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    6 माह पूरे, वादे अधूरे... जनसुराज पार्टी ने बिहार सरकार पर बोला हमला; RJD ने JDU अध्यक्ष को दिखाया आईना 

    Updated: Wed, 20 May 2026 11:12 PM (IST)

    जन सुराज पार्टी ने बिहार सरकार पर युवाओं, महिलाओं और मजदूरों से विश्वासघात का आरोप लगाते हुए कहा कि 6 माह में वादे पूरे नहीं हुए और बेरोजगारी-पलायन जा ...और पढ़ें

    मनोज भारती और चितरंजन गगन। फाइल फोटो

    मनोज भारती और चितरंजन गगन। फाइल फोटो

    HighLights

    1. जन सुराज ने बिहार सरकार पर युवाओं, महिलाओं से विश्वासघात का आरोप लगाया।

    2. जन सुराज ने अधूरे रोजगार वादों, बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताई।

    3. राजद ने जदयू अध्यक्ष को पुराने संबंध याद दिलाए, मर्यादित जवाब मांगा।

    राज्य ब्यूरो, पटना। जन सुराज पार्टी (जसुपा) ने बिहार सरकार पर युवाओं, महिलाओं और मजदूरों के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया है। प्रेस-वार्ता कर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि नव-निर्वाचित सरकार के छह माह पूरे हो गए, लेकिन चुनाव के समय जनता से किए गए वादे धरातल पर नहीं उतरे।

    पांच वर्ष में एक करोड़ रोजगार का वादा था। इस हिसाब से अब तक लगभग 9.85 लाख नौकरियां मिल जानी चाहिए थीं। इसके बजाय बेरोजगारी-पलायन बदस्तूर है। मात्र 25 प्रतिशत श्रमिकों को राज्य में काम मिल पा रहा।

    71 प्रतिशत को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का आसरा है। प्रदेश प्रवक्ता विवेक कुमार ने टीआरई-4 के अभ्यर्थियों से छल का आरोप लगाया। कहा कि आंदोलनरत अभ्यर्थियों पर केस दर्ज करना युवाओं की आवाज दबाने का उपक्रम है।

    प्रवक्ता पद्मा ओझा ने हत्या, दुष्कर्म आदि आपराधिक घटनाओं में वृद्धि पर चिंता जताई। एनपी मंडल ने बताया कि आज से ''बिहार नवनिर्माण अभियान'' के नए चरण की शुरुआत हो रही है।

    राजद ने दिखाया जदयू अध्यक्ष को आइना

    राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के विरुद्ध बयान के लिए पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की आलोचना की है।

    आईना दिखाते हुए उन्होंने कहा कि कुशवाहा यह मत भूलें कि जिस शासन-काल को वे जंगलराज बता रहे, उस समय वे राजद के ही सदस्य थे और 2005 के विधानसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी रहे थे।

    यदि तेजस्वी कानून-व्यवस्था, महिलाओं की स्थिति, नौकरी-रोजगार, महंगाई-भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा रहे, तो सत्ताधारी दलों को सार्थक उत्तर देना चाहिए, नहीं कि फूहड़ बयानबाजी हो। यह बात अलग कि कि जदयू का पूर्णतः भगवाकरण हो गया है, लेकिन उसके प्रदेश अध्यक्ष की भाषा मर्यादित होना चाहिए।  

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