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    Bihar Government Scheme: हाथों का जादू! जीविका दीदियों की सिलाई से 225 करोड़ का टर्नओवर

    Updated: Mon, 26 Jan 2026 11:37 AM (IST)

    जीविका दीदियां अब आंगनबाड़ी बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण पोशाक सिलकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। इस पहल से 225 करोड़ रुपये के टर्नओवर का ल ...और पढ़ें

    जीविका दीदियों की सिलाई से 225 करोड़ का टर्नओवर

    जीविका दीदियों की सिलाई से 225 करोड़ का टर्नओवर

    HighLights

    1. जीविका दीदियां आंगनबाड़ी बच्चों के लिए पोशाक सिलकर आत्मनिर्भर बन रही हैं।

    2. पोशाक सिलाई से 225 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य।

    3. हजारों महिलाओं को मिल रहा स्थायी रोजगार और सम्मान।

    डिजिटल डेस्क, पटना। जीविका दीदियां अब सिर्फ आत्मनिर्भरता की मिसाल नहीं रहीं, बल्कि राज्य के नौनिहालों का भविष्य संवारने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और एकरूप पोशाक तैयार कर ये दीदियां अपने हुनर से रोजगार और सम्मान, दोनों हासिल कर रही हैं।

    आंगनबाड़ी ड्रेस सिलाई से तय हुआ 225 करोड़ का लक्ष्य

    जीविका समूहों की दीदियों द्वारा बच्चों के ड्रेस की सिलाई से 225 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल न केवल बच्चों को आकर्षक पोशाक उपलब्ध करा रही है, बल्कि हजारों महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका का जरिया भी बन चुकी है।

    हुनर से संवर रहा बचपन, बढ़ रही आत्मनिर्भरता

    शून्य से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को अब जीविका दीदियों के हाथों सिली गई ड्रेस मिल रही है। इन पोशाकों में गुणवत्ता के साथ एकरूपता भी सुनिश्चित की जा रही है। इससे बच्चों के साथ-साथ महिलाओं के कौशल को भी पहचान और बाजार मिल रहा है।

    सरकारी स्कूलों तक पहुंचेगी जीविका दीदियों की सिलाई

    योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने भविष्य में सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भी ड्रेस जीविका दीदियों से ही सिलवाने का निर्णय लिया है। इससे महिलाओं को और अधिक रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।

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    15 जिलों में बने आधुनिक सिलाई सह उत्पादन केंद्र

    वर्ष 2022 में शुरू ‘जीविका दीदी की सिलाई घर’ योजना के तहत राज्य के 15 जिलों में 25 आधुनिक सिलाई सह उत्पादन केंद्र और प्रखंड स्तर पर 1050 सिलाई केंद्र स्थापित किए गए हैं।

    45,945 दीदियों को मिला प्रशिक्षण

    इन सिलाई केंद्रों पर सेवा देने के लिए अब तक 45 हजार 945 जीविका दीदियों को सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 23 हजार 535 दीदियों ने आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए ड्रेस सिलाई का कार्य शुरू भी कर दिया है।

    एक लाख से अधिक केंद्रों तक ड्रेस पहुंचाने की तैयारी

    इस मुहिम के तहत आने वाले समय में राज्य के 1 लाख 13 हजार 971 स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों की ड्रेस उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। अनुमान है कि करीब 50 लाख बच्चों को प्रति वर्ष दो सेट ड्रेस दी जाएगी।

    रोजाना 8–10 ड्रेस सिल रही हैं जीविका दीदियां

    नोडल अधिकारियों के अनुसार एक जीविका दीदी प्रतिदिन औसतन 8 से 10 ड्रेस की सिलाई कर रही हैं। सुविधा के लिए क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) स्तर पर 15–20 और केंद्रीय प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्रों पर 60–70 सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई हैं।

    सुबह से शाम तक लक्ष्य की ओर बढ़ता काम

    प्रशिक्षित जीविका दीदियां सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सिलाई केंद्रों पर काम कर रही हैं। संगठित ढांचे और आधुनिक संसाधनों के कारण उत्पादन की गति लगातार बढ़ रही है।