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    962 करोड़ से किऊल-झाझा रेलखंड पर बनेगी तीसरी लाइन; बिहार को बड़ी सौगात, हावड़ा-दिल्ली कॉरिडोर की बढ़ेगी क्षमता

    Updated: Tue, 19 May 2026 12:02 PM (GMT+05:30)

    भारतीय रेलवे ने बिहार के किऊल-झाझा रेलखंड पर 962 करोड़ रुपये की लागत से 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी है। यह परियोजना हावड़ा-द ...और पढ़ें

    हावड़ा-दिल्ली हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर बढ़ेगी रेल क्षमता।

    हावड़ा-दिल्ली हाई डेंसिटी कॉरिडोर पर बढ़ेगी रेल क्षमता।

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    जागरण संवाददाता, पटना। भारतीय रेलवे ने बिहार के किऊल-झाझा रेलखंड पर 54 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है।

    इस परियोजना पर कुल 962 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह परियोजना हावड़ा-दिल्ली हाई ट्रैफिक डेंसिटी कारिडोर पर रेल क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि किऊल-झाझा तीसरी लाइन परियोजना से इस अत्यधिक व्यस्त रेलखंड पर परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    हावड़ा-दिल्ली हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर पर बढ़ेगी क्षमता

    इससे ट्रेनों की समयबद्धता बेहतर होगी और यात्री तथा मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुचारु रूप से किया जा सकेगा।

    रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में किऊल-झाझा के बीच मौजूद डबल लाइन सेक्शन अपनी क्षमता से अधिक दबाव में संचालित हो रहा है।

    आने वाले वर्षों में यात्री एवं माल परिवहन की मांग और बढ़ने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त लाइन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

    54 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित तीसरी लाइन बनने से रेलखंड पर भीड़भाड़ कम होगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक तेज एवं व्यवस्थित हो सकेगी।

    इससे पटना और कोलकाता के बीच रेल संपर्क और मजबूत होगा, वहीं पूर्वी एवं उत्तरी भारत के औद्योगिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को भी लाभ मिलेगा।

    यात्री और मालगाड़ियों का परिचालन होगा सुगम

    यह रेलखंड कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों को रक्सौल तथा नेपाल से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा बरौनी ताप विद्युत परियोजना, जवाहर एसटीपीपी तथा बीरगंज आईसीडी से जुड़े माल परिवहन का भी बड़ा दबाव इसी मार्ग पर रहता है।

    भारतीय रेलवे ने इस सेक्शन को हाई ट्रैफिक डेंसिटी नेटवर्क कॉरिडोर के तहत चिन्हित किया है। रेल मंत्रालय का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद यात्री सुविधाओं में सुधार होगा। 

    माल ढुलाई अधिक प्रभावी बनेगी और पूर्वी तथा उत्तरी भारत के प्रमुख आर्थिक केंद्रों के बीच लाजिस्टिक कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।