बिहार में जमीन-फ्लैट की रजिस्ट्री के लिए OTP सिस्टम लागू, स्टाम्प ड्यूटी और निबंधन शुल्क बढ़ेगा
सरकार ने जमीन-फ्लैट रजिस्ट्री के लिए ओटीपी सिस्टम लागू किया है। इससे ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में देरी हो रही है, क्योंकि खरीदार-विक्रेता के मोबाइल पर ओटीप ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, पटना। जमीन-फ्लैट की रजिस्ट्री को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने अब ओटीपी सिस्टम लागू किया है। अब रजिस्ट्री के लिए पहले एनजीडीआरएस पोर्टल पर ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग करानी होती है। इसमें क्रेता, विक्रेता व जमीन का विवरण भरने के साथ एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) के अनुसार मूल्यांकन दर्ज करना होता है।
इसके बाद सब रजिस्ट्रार कार्यालय में दस्तावेज जमा कराने के लिए तिथि व समय का अप्वाइंटमेंट लेना होता है। अब जैसे ही अप्वाइंटमेंट के लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे, खरीदार व विक्रेता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ओटीपी जाएगा जो एक मिनट तक ही मान्य होगा। इस बीच ओटीपी नहीं डालने पर अप्वाइंटमेंट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ेगी।
इस कारण से हर दिन रजिस्ट्री कराने पहुंच रहे 50 से 60 लोगों में से केवल 10 से 15 लोगों का कार्य हो पा रहा है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा उद्योग लगाने के लिए जमीन खरीद रहे व्यापारियों व प्रॉपर्टी डीलर के एजेंट्स को परेशानी हो रही है।
कारण ये लोग सामान्यत: किसानों से जमीन से खरीदते हैं जो या तो जल्दी फोन पर उपलब्ध नहीं होते हैं और बात भी हो जाए तो साइबर क्राइम का शिकार होने के डर से ओटीपी नहीं बताते हैं।
वित्तीय वर्ष का अंतिम समय, उस पर एवीआर बढ़ने का डर :
बताते चलें कि सरकार ने 12 वर्ष बाद जनवरी 2026 से एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) में वृद्धि की घोषणा की थी, हालांकि यह अभी लागू नहीं हुई है। ऐसे में काफी पहले फ्लैट या प्लाट खरीदने वाले लोग एवीआर में वृद्धि के पहले ही रजिस्ट्री कराने को पहुंच रहे हैं।
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दूसरी ओर, वित्तीय वर्ष के अंतिम दो माह के कारण भी रजिस्ट्री कराने वालों की भीड़ है। ऐसे में एजेंट्स के माध्यम से रजिस्ट्री प्रक्रिया का पूरा कार्य कराने वाले लोगों के लिए वन टाइम पासवर्ड यानी ओटीपी सिस्टम मुसीबत से कम नहीं है।
इस नई व्यवस्था से सेवा शुल्क लेकर रजिस्ट्री कराने वाले बिचौलियों को भारी परेशानी हो रही है। वहीं, इस प्रक्रिया का लाभ यह है कि अब खरीदार व विक्रेता को उनके मोबाइल पर स्पष्ट जानकारी मिल जाती है कि उन्हें किस दिन और किस समय सब रजिस्ट्रार कार्यालय जाना है। इससे अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
ओटीपी आधारित अप्वाइंटमेंट अभी नई व्यवस्था है। ऐसे में लोग अभी खुद को इस प्रक्रिया के अनुरूप तैयार नहीं कर सके हैं। फरवरी-मार्च में सामान्यत: अधिक रजिस्ट्री होती है, ऐसे में भीड़ दिख रही है। कुछ दिन में लोग इस अधिक सुरक्षित-पारदर्शी प्रक्रिया के अनुसार रजिस्ट्री कराना सीख जाएंगे। - रवि रंजन, सब रजिस्ट्रार पटना
राजस्व लक्ष्य पाने में होगी परेशानी :
निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों के अनुसार ओटीपी प्रक्रिया लागू होने के बाद प्रतिदिन रजिस्ट्री की संख्या औसतन 30–35 से घटकर 10–15 रह गई है। इधर, एमवीआर में कभी भी 200 से तीन सौ प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इसके पहले ही रजिस्ट्री कराने के लिए आजकल लोग ज्यादा आ रहे हैं।
बताते चलें कि जिले में इस वर्ष राजस्व वसूली का लक्ष्य 1500 करोड़ तो अकेले पटना सदर का लगभग 725 करोड़ रुपये है। एक तिहाई रजिस्ट्री होने से राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति मुश्किल लग रही है।
स्टाम्प ड्यूटी व निबंधन शुल्क बढ़ेगा :
सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के अंतिम माह तक पटना समेत कई जिलों में एमवीआर (मिनिमम वैल्यू रजिस्टर) वृद्धि की घोषणा की थी। इसके लिए जमीन व मकानों के बाजार मूल्य का आकलन किया गया था। बाजार भाव, सरकारी योजनाओं, सड़क-पुल, मेट्रो, फ्लाईओवर व शहरी विकास परियोजनाओं को ध्यान में रखकर नई दरें तय की जाएंगी।
इसके अनुसार पटना का एमवीआर 200 से 300 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसी के अनुरूप स्टाम्प ड्यूटी व निबंधन शुल्क बढ़ जाएगा। यही कारण है कि सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में इन दिनों रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या बढ़ गई है।