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    बिहार में अवैध नर्सिंग होम पर लगेगी लगाम, सभी छोटे-बड़े अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन हुआ अनिवार्य

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 09:36 PM (IST)

    बिहार में बिना पंजीकरण चल रहे नर्सिंग होम और निजी अस्पतालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नई नियमावली को प्रभावी ढंग से ला ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर

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    HighLights

    1. बिना पंजीकरण वाले नर्सिंग होम, अस्पतालों पर होगी सख्त कार्रवाई।

    2. पटना हाईकोर्ट ने नई नियमावली को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

    3. सभी छोटे स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण अब अनिवार्य।

    विधि संवाददाता, पटना। बिहार में बिना पंजीकरण संचालित हो रहे नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिक और छोटे निजी अस्पतालों पर अब सख्ती से कार्रवाई होगी।

    राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य प्रतिष्ठान (स्थापना एवं पंजीकरण) नियमावली, 2026 को लेकर पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किए जाने पर राज्यभर में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, मैटरनिटी क्लीनिक और निजी अस्पतालों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

    भोजपुर जिले के बड़हरा थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राजीव रॉय की एकलपीठ ने उक्त टिप्पणी की।

    सुनवाई के दौरान एक कथित अस्पताल की जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई, जिसमें पाया गया कि वह महज दो कमरों में संचालित हो रहा था और अस्पताल के न्यूनतम मानकों पर भी खरा नहीं उतरता था।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित सरकारी अधिवक्ता (जीपी-2) प्रशांत प्रताप ने अदालत को बताया कि स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना के तहत एक से 40 बेड तक की क्षमता वाले सभी छोटे अस्पतालों, नर्सिंग होम एवं क्लीनिकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।

    उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि नियमावली का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर संतोष व्यक्त करते हुए अदालत ने राज्य सरकार की पहल और सरकारी अधिवक्ता के सहयोग की सराहना की तथा अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

    नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई 

    नई नियमावली के अनुसार, जिला स्तर पर सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी की अध्यक्षता में जिला पंजीकरण प्राधिकरण का गठन किया गया है। सामान्य प्रावधानों के उल्लंघन पर पहली बार 10 हजार, दूसरी बार 25 हजार तथा इसके बाद प्रत्येक उल्लंघन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

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    बिना पंजीकरण स्वास्थ्य प्रतिष्ठान संचालित करने पर भी क्रमशः 10 हजार और 25 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। लगातार उल्लंघन की स्थिति में प्रतिष्ठान को सील कर भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    निरीक्षण के दौरान गलत सूचना देने, जानकारी छिपाने अथवा जांच में बाधा पहुंचाने पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने पंजीकरण प्रक्रिया को भी सरल बनाया है।

    इच्छुक स्वास्थ्य प्रतिष्ठान 500 रुपये शुल्क के साथ ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के 15 दिनों के भीतर एक वर्ष के लिए अस्थायी पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, जिसे अधिकतम दो बार नवीनीकृत कराया जा सकेगा। इस अवधि के भीतर संस्थानों को स्थायी पंजीकरण के लिए निर्धारित मानकों का अनुपालन करना होगा।

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