बिहार में सवर्णों के लिए राहत: सभी 38 जिलों में तैनात होंगे नोडल अफसर, EWS और आरक्षण मामलों में नहीं होगी देरी
बिहार में सवर्ण समाज की शिकायतों के समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है, जिसके तहत सभी 38 जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। ...और पढ़ें

बिहार में सवर्णों के लिए राहत, सभी 38 जिलों में तैनात होंगे नोडल अफसर (AI Generated Image)
HighLights
सभी 38 जिलों में नोडल अधिकारियों की तैनाती होगी।
शिकायतों का जिला स्तर पर ही त्वरित निपटारा होगा।
EWS, उत्पीड़न, सरकारी योजनाओं में बाधाएं सुलझेंगी।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में सवर्ण समाज से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। राज्य के सभी 38 जिलों में नोडल अधिकारियों की तैनाती होगी। इन अधिकारियों का उद्देश्य शिकायतों का जिला स्तर पर ही त्वरित निपटारा करना होगा।
इससे लोगों को बार-बार पटना स्थित राज्य सवर्ण आयोग का रुख नहीं करना पड़ेगा।जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।
नोडल अफसरों का काम आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से जुड़े मामलों, जातीय भेदभाव, उत्पीड़न और सरकारी योजनाओं के लाभ में आने वाली बाधाओं पर नजर रखना होगा साथ ही जरूरत पड़ने पर संबंधित थाना, अंचल और अन्य विभागों के साथ समन्वय कर कार्रवाई भी सुनिश्चित कर सकेंगे।
ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति और आरक्षण से जुड़े मामलों में होने वाली देरी को कम करना भी इनकी प्रमुख जिम्मेदारी होगी। पात्र युवाओं और छात्रों को समय पर योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए वे सीधे निगरानी करेंगे। जिला स्तर पर आने वाली समस्याओं की नियमित रिपोर्ट राज्य सवर्ण आयोग को भेजी जाएगी।
आयोग की भविष्य की योजनाओं को लागू कराने में भी नोडल अधिकारियों की भूमिका अहम होगी। गरीब सवर्ण विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, नि:शुल्क कोचिंग, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े प्रस्तावों के क्रियान्वयन में भी वे जिला प्रशासन और आयोग के बीच समन्वय का काम करेंगे।
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नोडल अधिकारियों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सभी चयनित अधिकारियों को 10 अगस्त को पटना के तारामंडल सभागार में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें शिकायतों के निस्तारण और आयोग के साथ समन्वय की कार्यप्रणाली समझाई जाएगी।
राज्य सवर्ण आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने के अनुसार, नई व्यवस्था से सवर्ण समाज के लोगों को योजनाओं का लाभ लेने और उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों के समाधान में काफी सहूलियत मिलेगी। जिला स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है।