36 साल बाद पंचायतों का परिसीमन, बिहार में डेढ़ गुना तक बढ़ सकती है पंचायतों की संख्या
बिहार मंत्रिमंडल ने 36 साल बाद त्रि-स्तरीय पंचायतों के परिसीमन को मंजूरी दे दी है, जिससे पंचायतों की संख्या डेढ़ गुना तक बढ़ने का अनुमान है। ...और पढ़ें

पंचायत चुनाव परिसीमन के बाद ही होंगे
HighLights
बिहार में 36 साल बाद पंचायत परिसीमन को मंजूरी।
पंचायतों की संख्या डेढ़ गुना बढ़कर 12 हजार से अधिक।
2011 की जनगणना के आधार पर होगा नया परिसीमन।
विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। बिहार में 36 वर्षों बाद त्रि-स्तरीय पंचायतों के परिसीमन का रास्ता साफ हो गया है। पंचायत प्रतिनिधियों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर राज्य मंत्रिमंडल ने मंगलवार को अपनी मंजूरी दे दी।
नए परिसीमन के बाद पंचायतों का आकार ही नहीं बदलेगा, बल्कि उनकी संख्या में भी लगभग डेढ़ गुना तक वृद्धि होने का अनुमान है। पंचायती राज विभाग ने इसका प्रारंभिक आकलन तैयार किया है।
पंचायत चुनाव परिसीमन के बाद ही होंगे
परिसीमन के बाद ही पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि, इसके कारण चुनाव में देरी की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही पंचायतों के निर्वाचकों और निर्वाचन क्षेत्रों का ब्योरा तैयार कर चुका है। ऐसे में संभावना है कि नवंबर-दिसंबर में चुनाव तय समय पर ही संपन्न होंगे।
1994 में हुआ था पिछला परिसीमन
बिहार में पंचायतों का पिछला परिसीमन वर्ष 1994 में हुआ था। उस समय 1991 की जनगणना को आधार बनाया गया था।
तब बिहार अविभाजित था और झारखंड भी उसका हिस्सा था। उस समय बिहार की कुल आबादी लगभग 8.64 करोड़ थी, जिसके आधार पर 8067 पंचायतों का गठन किया गया था।
अब 2011 की जनगणना बनेगी आधार
इस बार परिसीमन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। इसके तहत ग्राम पंचायत, वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का नए सिरे से निर्धारण होगा।
राज्य में पंचायतों की संख्या बढ़कर 12 हजार से अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही अन्य पंचायती इकाइयों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
जनसंख्या वृद्धि के साथ बढ़ेगा प्रतिनिधित्व
वर्ष 2011 में बिहार की जनसंख्या बढ़कर 10.41 करोड़ पहुंच गई थी। इसमें 5.43 करोड़ पुरुष और 4.98 करोड़ महिलाएं शामिल थीं।
झारखंड के अलग राज्य बनने के बाद भी बिहार की आबादी में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी कारण पंचायतों और जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई।
पंचायत प्रतिनिधियों ने फैसले का किया स्वागत
मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय का कहना है कि जनसंख्या के अनुरूप पंचायतों के पुनर्गठन से प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित होगा।
उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सुविधाओं और योजनाओं का लाभ लोगों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंच सकेगा।
संतुलित विकास और पारदर्शिता पर रहेगा जोर
सरकार का उद्देश्य सभी क्षेत्रों का संतुलित विकास सुनिश्चित करना और भौगोलिक तथा सामाजिक एकरूपता बनाए रखना है।
पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने उम्मीद जताई है कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न होगी और पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएंगे।
परिसीमन के बाद संभावित स्थिति
| पद | वर्तमान संख्या | संभावित संख्या |
|---|---|---|
| जिला परिषद सदस्य | 1,160 | 1,740 |
| पंचायत समिति सदस्य | 11,094 | 16,642 |
| मुखिया-सरपंच | 8,067 | 12,100 |
| वार्ड सदस्य-पंच | 1,09,695 | 1,64,542 |
परिसीमन के बाद पंचायत व्यवस्था को अधिक सशक्त, न्यायपूर्ण और प्रभावी बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।