गांवों के गरीबों से कोई टैक्स नहीं लेगी सरकार, RJD एमएलसी के प्रश्न पर CM ने दिया जवाब
बिहार विधानसभा और विधान परिषद में प्रस्तावित पंचायत कर व्यवस्था को लेकर हंगामा हुआ, विपक्ष ने इसे गरीबों पर बोझ बताया। सरकार ने स्पष्ट किया कि गरीबों ...और पढ़ें
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पंचायत कर पर विधानसभा और विधान परिषद में हंगामा।
सरकार ने स्पष्ट किया, गरीबों पर कोई नया कर नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा, केवल होर्डिंग जैसे प्रावधानों पर चर्चा।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार की पंचायतों में प्रस्तावित कर व्यवस्था को लेकर मंगलवार को मानसून सत्र के दूसरे दिन विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों में जोरदार तरीके से विपक्ष ने मामला उठाया।
विपक्ष ने इसे गरीब और ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम बताते हुए सरकार को घेरा, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया कि गरीबों पर कोई नया टैक्स लगाने का प्रावधान नहीं है।
विधानसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव, विपक्ष का हंगामा
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने पंचायत टैक्स और आकस्मिकता निधि के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग करते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया।
माले विधायक ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून ग्रामीण गरीबों को परेशान करने वाला है और सरकार पंचायतों के माध्यम से लोगों पर नया कर बोझ डालना चाहती है।
जब विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो विपक्षी विधायक वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे।
सदन में कुछ देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। अध्यक्ष ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीट पर लौटने और कार्यवाही चलने देने की अपील की।
विजय कुमार चौधरी बोले- विधेयक आएगा तो होगी पूरी चर्चा
सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जब संबंधित विधेयक सदन में आएगा, तब उसके सभी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा होगी और सदन की राय के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा।
विधान परिषद में भी उठा मुद्दा
पंचायत टैक्स का मामला विधान परिषद में भी जोर-शोर से उठा। राजद के विधान पार्षद डॉ. सुनील कुमार सिंह ने पंचायतों में होल्डिंग टैक्स वसूली के प्रस्ताव को जनविरोधी बताया।
कहा कि आज भी बिहार की करीब 76 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है और ग्रामीण परिवारों की औसत आय 76 हजार रुपये से भी कम है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग आज भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले अनाज पर निर्भर हैं। ऐसे में पंचायत स्तर पर नया टैक्स लगाने का प्रयास अंग्रेजी शासनकाल की दमनकारी कर व्यवस्था की याद दिलाता है।
मुख्यमंत्री ने किया स्पष्ट, गरीबों पर नया टैक्स नहीं
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीबों पर नया टैक्स लगाने जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांवों में लगे होर्डिंग आदि से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा चल रही है, न कि आम ग्रामीण परिवारों पर कर लगाने की।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पंचायतों में पहले से कचरा प्रबंधन और नल-जल जैसी सेवाओं के लिए 30-30 रुपये का शुल्क लिया जाता है।
सरकार ने जो नियम बनाए हैं, उनमें आवश्यकता के अनुसार बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन गरीबों पर टैक्स लगाने की बात पूरी तरह निराधार और भ्रामक है।
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