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    प्रदेश में निजी परीक्षा केंद्रों का अस्तित्व खतरे में, बिहार एसोसिएशन ने BSEB की मौजूदा नीति पर उठाए गंभीर सवाल

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 07:05 AM (IST)

    बिहार ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर एसोसिएशन ने BSEB की मौजूदा नीति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह नीति पीपीपी मोड वाले केंद्रों को प्राथमिकता देकर ल ...और पढ़ें

    परीक्षा नीति से प्रदेश के 200 ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों का अस्तित्व संकट में: संघ। फोटो जागरण

    परीक्षा नीति से प्रदेश के 200 ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों का अस्तित्व संकट में: संघ। फोटो जागरण

    HighLights

    1. निजी परीक्षा केंद्रों का अस्तित्व BSEB की नीति से खतरे में।

    2. पीपीपी केंद्रों को प्राथमिकता, 50 हजार रोजगार पर संकट।

    3. लंबित भुगतान और समान अवसर की मांग, CM से अपील।

    जागरण संवाददाता, पटना। बिहार ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर एसोसिएशन ने बिहार सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की मौजूदा परीक्षा नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे प्रदेश के करीब 200 निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

    बोरिंग रोड स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष कन्हैया सिंह ने कहा कि सरकारी नाम पर पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में संचालित बापू परीक्षा केंद्र और आदर्श परीक्षा केंद्रों को प्राथमिकता देकर वर्षों से कार्यरत स्थानीय निजी केंद्रों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।

    उन्होंने बताया कि बिहार सरकार और BSEB द्वारा अब तक बापू और आदर्श परीक्षा केंद्रों में लगभग 11,500 कंप्यूटर नोड्स लगाए जा चुके हैं, जबकि हाल ही में 10,000 नए कंप्यूटर लगाने की निविदा भी जारी की गई है। ये केंद्र पीपीपी मोड पर बड़ी निजी कंपनियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। इसके उलट बिहार में लगभग 250 निजी परीक्षा केंद्र हैं, जिनमें करीब 15,000 कंप्यूटर नोड्स उपलब्ध हैं और कई केंद्र वर्ष 2010-11 से लगातार सफलतापूर्वक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करा रहे हैं।

    संघ का कहना है कि जब बिहार में सरकारी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र नहीं थे, तब निजी केंद्रों ने अपने संसाधनों से ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को खड़ा किया। आज स्थिति यह है कि लगभग सभी सरकारी परीक्षाएं केवल पीपीपी मोड वाले केंद्रों में कराई जा रही हैं, जबकि स्थानीय निजी केंद्रों को कोई अवसर नहीं मिल रहा। इससे सीधे तौर पर 50 हजार से अधिक लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।

    खबरें और भी

    प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि वर्ष 2023 में BSEB द्वारा आयोजित शिक्षक पात्रता और सक्षमता परीक्षाओं के संचालन में शामिल निजी कंपनियों के माध्यम से सैकड़ों केंद्रों से परीक्षा तो कराई गई, लेकिन जनवरी 2026 तक किसी भी केंद्र को भुगतान नहीं किया गया। उल्टे भुगतान मांगने पर केंद्र संचालकों को लीगल नोटिस भेजकर डराया जा रहा है। अत्यंत कम दर पर काम कराए जाने और बाद में केंद्रों को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी को संघ ने आर्थिक शोषण बताया।

    संघ ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्र बिहार के ही लोगों की आजीविका का साधन हैं और इन्हें समाप्त करना हजारों परिवारों के भविष्य को अंधकार में धकेल देगा।

    प्रमुख मांगें

    • निजी परीक्षा केंद्रों का लंबित भुगतान अविलंब कराया जाए
    • संबंधित एजेंसियों और कंपनियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच हो
    • स्थानीय निजी ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों को भी सरकारी परीक्षाओं में समान अवसर मिले
    • निजी परीक्षा केंद्रों के हित संरक्षण के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए