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    बिहार के लाखों जमीन मालिकों के लिए नया नियम; रेवेन्‍यू कोर्ट में कागजी दस्तावेज जमा करने की जरूरत खत्म

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 03:47 PM (IST)

    राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार के राजस्व न्यायालयों में मामलों के निष्पादन को पूरी तरह डिजिटल बनाने का फैसला किया है। अब सुनवाई के दौरान केवल ऑन ...और पढ़ें

    राजस्‍व व‍िभाग की व्‍यवथा हुई ड‍िज‍िटल।सांकेति‍क तस्‍वीर

    राजस्‍व व‍िभाग की व्‍यवथा हुई ड‍िज‍िटल।सांकेति‍क तस्‍वीर

    HighLights

    1. राजस्व न्यायालयों में अब सिर्फ ऑनलाइन साक्ष्य मान्य होंगे।

    2. भौतिक दस्तावेज या साक्ष्य स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    3. RCMS पोर्टल पर ही सभी अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड होंगे।

    राज्य ब्यूरो, पटना। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राजस्व न्यायालयों में लंबित और नए मामलों के निष्पादन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है।

    अब राजस्व न्यायालयों में किसी भी वाद की सुनवाई के दौरान आवेदक या विपक्षी पक्ष से किसी भी प्रकार का भौतिक साक्ष्य या दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेज और साक्ष्य ही मान्य होंगे।

    विभाग के सचिव जय सिंह ने राज्य के सभी समाहर्ताओं, अपर समाहर्ताओं, भूमि सुधार उपसमाहर्ताओं (डीसीएलआर) और अंचल अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

    शुरू से अंत तक की प्रक्र‍िया ऑनलाइन 

    उन्होंने कहा है कि राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) के तहत वाद दायर करने से लेकर अंतिम आदेश पारित करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जानी है।

    विभाग को जानकारी मिली थी कि कई स्थानों पर सुनवाई के दौरान पक्षकारों से भौतिक रूप से दस्तावेज लिए जा रहे हैं, जो निर्धारित व्यवस्था के विपरीत है।

    राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के निर्देश पर इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग ने इस पर तत्काल रोक लगाने का आदेश जारी किया है।

    जरूरत पड़ने पर RCMS पोर्टल पर ही अपलोड होंगे अतिरिक्त दस्तावेज

    नए निर्देश के अनुसार, यदि किसी मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त साक्ष्य या दस्तावेज की आवश्यकता होती है, तो संबंधित पक्षकारों को केवल RCMS पोर्टल पर ही दस्तावेज अपलोड करने के लिए कहा जाएगा।

    राजस्व न्यायालय भी केवल पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही मामलों का निष्पादन करेंगे। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी होगी।

    दस्तावेजों से छेड़छाड़ या विवाद की आशंका समाप्त होगी और सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेंगे। साथ ही लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने या कागजी दस्तावेज जमा कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

    सचिव जय सिंह ने सभी जिला और अंचल स्तरीय अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया है, ताकि राज्य में राजस्व न्यायालयों की ऑनलाइन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी ढंग से लागू हो सके।