बिहार में बालू घाटों के बार-बार सरेंडर होने पर सरकार गंभीर, अब ठेकेदारों से पूछेगी अंदर की बात
बिहार सरकार बार-बार सरेंडर हो रहे बालू घाटों की समीक्षा के लिए बंदोबस्त धारियों के साथ विशेष बैठक करेगी। इसका उद्देश्य समस्याओं को समझकर अवैध खनन रोकन ...और पढ़ें
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प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
सरकार सरेंडर बालू घाटों की समीक्षा करेगी।
बंदोबस्त धारियों से समस्याओं पर सीधी चर्चा होगी।
अवैध खनन रोकने और राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में बार-बार सरेंडर हो रहे बालू घाटों को लेकर अब सरकार गंभीर पहल करने जा रही है। राज्य सरकार ऐसे सभी बालू घाटों के बंदोबस्त धारियों के साथ विशेष बैठक करेगी, ताकि यह समझा जा सके कि आखिर किन कारणों से घाटों का संचालन बीच में ही छोड़ना पड़ रहा है।
खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री प्रमोद कुमार ने अधिकारियों को इस दिशा में विस्तृत अध्ययन और संवाद की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसर विभागीय स्तर पर होने वाली इस बैठक में बंदोबस्त धारियों से सीधे उनकी समस्याएं और अनुभव साझा की जानकारी ली जाएगी। जानने के प्रयास होंगे कि बालू घाटों के बार-बार सरेंडर होने के पीछे मुख्य वजहें क्या हैं।
इसमें घाट की सुरक्षित राशि (रिजर्व प्राइस), अवैध खनन की समस्या, घाटों का आकार, परिवहन व्यवस्था, स्थानीय विवाद, पर्यावरणीय शर्तें, प्रशासनिक कठिनाइयां और आर्थिक व्यवहार्यता जैसे तमाम पहलुओं पर चर्चा होगी।
घाटों की सुरक्षित राशि अधिक
सूत्रों के अनुसार कई बंदोबस्तधारियों ने पहले भी यह शिकायत की है कि कुछ घाटों की सुरक्षित राशि अत्यधिक होने के कारण संचालन लाभकारी नहीं रह जाता।
वहीं, कई स्थानों पर अवैध खनन और असंगठित गतिविधियों के कारण वैध बंदोबस्तधारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
इसके अलावा नदी की भौगोलिक स्थिति बदलने, पहुंच मार्ग की कमी और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न विवाद भी संचालन में बाधा बनते हैं।
समाधान तलाशने में जुटी सरकार
सरकार अब इन समस्याओं के मूल कारणों तक पहुंचकर स्थायी समाधान तलाशने की तैयारी में है। विभाग का मानना है कि यदि बंदोबस्तधारियों की व्यावहारिक परेशानियों को समझकर नीतिगत सुधार किए जाएं तो बालू घाटों के बार-बार सरेंडर होने की समस्या कम हो सकती है। इससे राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ वैध खनन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
मंत्री प्रमोद कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बैठक में प्राप्त सुझावों और शिकायतों का गंभीरता से विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में बालू घाटों के संचालन को अधिक व्यवहारिक और पारदर्शी बनाया जा सके।