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    Bihar Stone Mining: बिहार में पत्थर खनन पट्टों की ई-नीलामी तेज, कलेक्टरों को मिले अधिकार

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 07:05 PM (IST)

    बिहार सरकार ने पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती के लिए ई-नीलामी सह-निविदा प्रक्रिया शुरू की है। अब जिला समाहर्त्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है, जिससे प्रक्र ...और पढ़ें

    बिहार में पत्थर खनन पट्टों की ई-नीलामी तेज, कलेक्टरों को मिले अधिकार (AI Generated Image)

    बिहार में पत्थर खनन पट्टों की ई-नीलामी तेज, कलेक्टरों को मिले अधिकार (AI Generated Image)

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    राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती प्रक्रिया को तेज और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब पत्थर भूखंडों की बंदोबस्ती ई-नीलामी सह-निविदा के माध्यम से कराई जाएगी।

    इसके अलावा इस कार्य की जिम्मेदारी सरकार ने जिला समाहर्त्ताओं (कलेक्टरों) को देने का निर्णय भी लिया है। सरकार के इस कदम से ई-नीलामी की प्रक्रिया में तेजी आएगी और खनन पट्टों का जल्द आवंटन संभव होगा।

    खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार अनुमोदित जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) में वार्षिक खनन योग्य पत्थर की मात्रा पर स्वामिस्व (रॉयल्टी) कर की प्राप्त राशि में 25 प्रतिशत की वृद्धि कर पहले वर्ष का न्यूनतम सुरक्षित मूल्य तय किया जाएगा। यानी अब खनन पट्टों का आधार मूल्य पहले की तुलना में अधिक होगा।

    नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक खनन पट्टे में उपलब्ध पत्थर की वास्तविक मात्रा के आधार पर न्यूनतम सुरक्षित मूल्य निर्धारित किया जाएगा। इससे ई-नीलामी में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ सरकार को अधिकतम राजस्व मिलने की संभावना है।

    सरकार का मानना है कि जिला स्तर पर अधिकार मिलने से ई-नीलामी की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी। साथ ही खनिज संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होगा और राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह फैसला खनन क्षेत्र में सुधार, निवेश को बढ़ावा देने और सरकारी आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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