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    बिहार में फाइलेरिया उन्मूलन का महाअभियान, 11 करोड़ लोगों को बांटी जाएगी फ्री दवा

    Updated: Sat, 31 Jan 2026 07:40 PM (GMT+05:30)

    बिहार में 10 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक 34 जिलों के 395 प्रखंडों में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एमडीए कार्यक्रम चलेगा। इसमें लगभग 11 करोड़ लोगों को फाइले ...और पढ़ें

    फाइलेरिया-रोधी दवाएं खिलाने का लक्ष्य। फाइल फोटो

    फाइलेरिया-रोधी दवाएं खिलाने का लक्ष्य। फाइल फोटो

    HighLights

    1. बिहार में 10-27 फरवरी 2026 तक एमडीए कार्यक्रम।

    2. 11 करोड़ लोगों को फाइलेरिया-रोधी दवाएं खिलाने का लक्ष्य।

    3. फाइलेरिया, कालाजार सहित NTDs उन्मूलन का प्रयास।

    जागरण संवाददाता, पटना। आगामी 10 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक बिहार के 34 जिलों के 395 प्रखंडों में एमडीए कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान लगभग 11 करोड़ लाभार्थियों को फाइलेरिया-रोधी दवाएं खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।

    फाइलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी लाभार्थियों को दवाएं उनके सामने खिलाएंगे, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।

    इस बाबत जानकारी देते हुए अपर निदेशक एवं राज्य फाइलेरिया कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. श्यामा राय ने बताया कि एनटीडी से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।

    उन्होंने कहा कि फाइलेरिया या हाथीपांव एक गंभीर रोग है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है। विश्व के 72 देश फाइलेरिया से प्रभावित हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। वैश्विक स्तर पर फाइलेरिया से पीड़ित कुल रोगियों में लगभग 40 प्रतिशत भारत में हैं।

    सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम 

    डॉ. राय ने बताया कि राज्य में फाइलेरिया जैसे एनटीडी के उन्मूलन के लिए सुनियोजित रणनीति के तहत सर्वजन दवा सेवन (मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

    राज्य में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्टेट एनटीडी कोआर्डिनेटर डॉ. राजेश पांडेय ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार नेग्लेक्टेड ट्रापिकल डिजीज उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहने वाले विश्व के एक अरब से अधिक लोगों को प्रभावित करती हैं।

    ये रोग विशेष रूप से गरीब और कमजोर वर्गों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एनटीडी के नियंत्रण और उन्मूलन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

    समय पर इलाज न मिलने से हुईं कई मौतें 

    एनटीडी के अंतर्गत लिम्फैटिक फाइलेरिया (हाथीपांव), विसेरल लीशमैनियासिस (कालाजार), कुष्ठ रोग, डेंगू, चिकुनगुनिया, सर्पदंश, रेबीज़ सहित लगभग 21 रोग शामिल हैं।

    इन रोगों के कारण अब तक कई ऐसी मौतें हुई हैं, जिन्हें समय रहते रोका जा सकता था। एनटीडी से प्रभावित लोगों को शारीरिक पीड़ा, विकृति, दिव्यांगता और सामाजिक उपेक्षा का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका और जीवन गुणवत्ता बुरी तरह प्रभावित होती है।

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