बिहार में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की पहल, सभी विश्वविद्यालयों में एक साथ शुरू होंगी 3 योजनाएं
बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्यपाल सचिवालय ने पहल की है। इसके तहत कुलपतियों को अलग सेल बनाने और तीन नई योजनाएं ...और पढ़ें
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राज्यपाल सैयद अता हसनैन। फाइल फोटो
HighLights
राज्यपाल सचिवालय ने शोध-नवाचार को बढ़ावा देने की मुहिम छेड़ी।
कुलपतियों को विश्वविद्यालयों में अलग शोध सेल बनाने का निर्देश।
तीन नई शोध योजनाएं इसी सत्र से होंगी लागू।
राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्यपाल सचिवालय के स्तर से मुहिम चलेगी। इसके लिए राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने सभी कुलपतियों को अलग से सेल गठित करने का निर्देश दिया है।
इस सत्र के अंत तक प्रत्येक विश्वविद्यालय में विशेषज्ञ नोडल अफसर तैनात किए जाएंगे, जो शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेंगे।
राज्यपाल सचिवालय ने कुलपतियों को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन के आलोक में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु एक पूरी योजना तैयार करने को कहा है।
राज्यपाल सचिवालय के मुताबिक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की शोध योजना के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अब शोध कार्यो से जुड़ना जरूरी होगा।
राज्यपाल सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के विश्वविद्यालयों में शोध एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कुलाधिपति पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप, मुख्यमंत्री शोध अनुदान योजना और मुख्यमंत्री शोध छात्रवृत्ति योजना इसी साल से लागू करने की तैयारी हो रही है।
जल्द जारी होगी गाइडलाइन
इन योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जल्द ही गाइडलाइन जारी की जाएगी। इन योजनाओं का उद्देश्य शोधार्थियों और युवा शिक्षाविदों को आर्थिक सहायता देकर विश्वविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा देना है।
राज्यपाल व कुलाधिपति के स्तर से राज्य के सभी कुलपतियों को निर्देश दिया गया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध को बढ़ावा देने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत जो प्रयास किए जा रहे हैं, उसे विश्वविद्यालय स्तर पर तेजी से अमल में लाएं क्योंकि वैश्विक स्तर पर बदलते शैक्षणिक अनुसंधान परिदृश्य में आज राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शोध की गुणवत्ता को बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए क्लासरूम टीचिंग के साथ शिक्षण के अन्य प्रारूपों को भी अपनाने की जरूरत है।