Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर लगेगा चंद्र ग्रहण, 9 घंटे पहले लगेगा सूतक; भूलकर भी ना करें ये काम

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 07:52 PM (IST)

    तीन मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा पर वर्ष का पहला खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। इसका सूतक सुबह 8:50 बजे से शुरू होगा, जिसमें पूजा-पाठ वर्जित रहेगा। ग्रहण शा ...और पढ़ें

    News Article Hero Image
    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, पटना। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तीन मार्च को वर्ष का पहला और अंतिम खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। चंद्र ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले आरंभ हो जाएगा। ऐसे में पूजा-पाठ, मंदिर के कपाट एवं मांगलिक कार्य बंद रहेगा। ग्रहण का सूतक तीन मार्च की सुबह 8.50 बजे से आरंभ हो जाएगा।

    चंद्र ग्रहण शाम 5.50 बजे से रात्रि के 6.46 बजे तक रहेगा। ग्रहण का समय लगभग एक घंटे का होगा। वहीं, मौसम विज्ञान केंद्र पटना ने चंद्र ग्रहण को लेकर सूचना जारी करते हुए बताया है कि देश के पश्चिमी भागों के कुछ स्थानों को छोड़ कर अधिसंख्य स्थानों पर ग्रहण साफ रूप से दिखाई देगा।

    पूर्वी भारत के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में सबसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा सिंह राशि में केतु के साथ होगा। भारत के अलावा ग्रहण पूर्वी एशिया, आस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के क्षेत्रों में भी दिखाई देगा।

    पटना में चंद्र ग्रहण का समय लगभग एक घंटे का होगा। पटना में चंद्र ग्रहण का समय शाम 5.51 बजे से आरंभ होगा। इसके अलावा, देश में दूसरा चंद्र ग्रहण छह जुलाई 2028 को लगेगा। यह चंद्र ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा।

    खबरें और भी

    विज्ञानी के अनुसार चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को घटित होता है। जब पृथ्वी सूर्य एवं चंद्रमा के बीच आती है चंद्र ग्रहण लगता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण तब घटित होता है जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी के प्रच्छाया से आवृत होता है।

    ग्रहण के बाद स्नान-दान से ग्रह दोष से मुक्ति

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में वेद मंत्र या बीज मंत्र का जाप, योग-मेडिटेशन, गायत्री मंत्र, हनुमान चालीसा आदि का पाठ करना शुभ माना जाता है।

    ग्रहण समाप्त होने पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करने के बाद गंगाजल में ईत्र मिलाकर पूरे घर में छिड़काव करने से धनलक्ष्मी व सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

    ग्रहण के बाद दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। सूतक काल में मंदिर में प्रवेश, मूर्ति का स्पर्श, भोजन करना, यात्रा, मूर्ति पूजा और तुलसी के पौधे का स्पर्श वर्जित है।

    चंद्र ग्रहण का फलाफल:

    • मेष: चिंता
    • वृष: व्यथा
    • मिथुन: धन लाभ
    • कर्क: क्षति
    • सिंह: घात
    • कन्या: हानि
    • तुला: लाभ
    • वृश्चिक: सुख
    • धनु: अयश
    • मकर: कष्ट
    • कुंभ: स्त्री पीड़ा
    • मीन: सुख