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    Chaturmas 2026: देवशयन के साथ 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास, इस साल शादियों के लिए अब केवल 16 मुहूर्त

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 07:00 AM (IST)

    25 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो रहा है, जिसके साथ ही भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन के लिए चले जाएंगे। ...और पढ़ें

    एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

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    HighLights

    1. 25 जुलाई से चातुर्मास आरंभ, भगवान विष्णु का शयन।

    2. शादी-विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर लगेगा विराम।

    3. चातुर्मास के बाद नवंबर-दिसंबर में शुभ विवाह मुहूर्त।

    जागरण संवाददाता, पटना। आषाढ़ शुक्ल एकादशी 25 जुलाई शनिवार को भगवान विष्णु शयन को लेकर क्षीर सागर में चले जाएंगे। इसके साथ चातुर्मास आरंभ हो जाएगा।

    20 नवंबर शुक्रवार को कार्तिक शुक्ल देवोत्थान एकादशी के दिन श्री हरि योग निद्रा से जागृत होंगे। चातुर्मास के दौरान शादी-विवाह समेत अन्य मांगलिक एवं शुभ कार्याें पर विराम लगा रहेगा।

    चातुर्मास के दौरान साधु-संत एक स्थान पर रहकर भजन-कीर्तन, भगवान का गुणगान एवं कथा प्रवचन समेत आदि धार्मिक कृत्य करेंगे।

    ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि चातुर्मास के दौरान भगवान शिव एवं उनके परिवार सृष्टि का संचालन करते हैं।

    चातुर्मास के दौरान सावन, गणपति उत्सव, हरितालिका तीज समेत अन्य व्रत होते हैं। इस दौरान श्रद्धालु भगवान शिव, गणेश, मां पार्वती का पूजन करते हैं।

    29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा, 30 से सावन आरंभ

    आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा 29 जुलाई बुधवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र एवं प्रीति योग में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन गुरु को देव तुल्य मानकर उनकी पूजा की जाएगी। श्रद्धालु महर्षि वेदव्यास का स्मरण कर पूजन करते हैं।

    30 जुलाई गुरुवार से भगवान शिव का प्रिय मास सावन आरंभ हो जाएगा। सावन के दौरान श्रद्धालु शिव भक्ति में लीन रहेंगे। घरों से लेकर शिव मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक, रूद्राभिषेक, पार्थिव पूजन आदि होंगे।

    सावन पूरे 30 दिनों का होगा। इसमें चार सोमवार का व्रत होगा। सावन को लेकर शहर के प्रमुख शिव मंदिरों की ओर से तैयारी की जा रही है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में संत-महात्मा यात्रा नहीं करते। संत चातुर्मास में एक स्थान पर रुक कर भजन संध्या में लीन रहते हैं। वहीं जैन धर्म में चातुर्मास को चौमासा कहा जाता है। माह में पर्युषण पर्व होता है।

    मिथिला में 10 तो बनारसी पंचांग में 16 मुहूर्त 

    शादी-विवाह के शुभ मुहूर्त 12 जुलाई तक है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी के समयावधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान शुभ कार्य नहीं होते हैं।

    चातुर्मास के बाद इस वर्ष में कुल 16 शुभ लग्न मुहूर्त शेष होंगे। बनारसी पंचांग के अनुसार नवंबर में छह तथा दिसंबर में 10 वैवाहिक लग्न है। मिथिला पंचांग के मुताबिक नवंबर में चार एवं दिसंबर में छह शुभ विवाह मुहूर्त है।

    वर्ष के वैवाहिक शुभ मुहूर्त 

    बनारसी पंचांग के अनुसार

    • नवंबर: 20,21,24,25,26,30
    • दिसंबर: 1,2,3,4,5,7,9,10,11,12

    मिथिला पंचांग के अनुसार

    • नवंबर: 22,25,26,30
    • दिसंबर: 4,6,9,10,11,14

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