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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 21, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Chirag Paswan: चिराग को विधानसभा में चाहिए 40 सीटें, जन सुराज से गठबंधन का भी विकल्प खुला!

    Updated: Mon, 21 Apr 2025 06:29 PM (IST)

    चिराग पासवान एनडीए में अधिक सीटों के लिए सक्रिय हैं उन्हें बिहार विधानसभा में कम से कम 40 सीटें चाहिए। सीटों के बंटवारे को लेकर वे प्रशांत किशोर की जन ...और पढ़ें

    जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और लोजपा (रा) के अध्यक्ष चिराग पासवान। फाइल फोटो
    जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और लोजपा (रा) के अध्यक्ष चिराग पासवान। फाइल फोटो

    HighLights

    1. एनडीए में अधिक हिस्सेदारी के लिए बिहार में सक्रियता बढ़ाएंगे चिराग
    2. सीटों को लेकर एनडीए से बात नहीं बनी तो जुड़ सकते हैं जन सुराज से

    अरुण अशेष, पटना। लोजपा (रा) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान एनडीए में अधिक हिस्सेदारी के लिए सक्रियता बढ़ा रहे हैं। उन्हें विधानसभा की कम से कम 40 सीटें चाहिए। एनडीए ने सीटों के बंटवारे का जो हिसाब बनाया है, उसमें चिराग के लिए 20-22 सीटें रखी गई हैं। यह उन्हें मंजूर नहीं है।

    एनडीए में बात बन जाती है तो ठीक है। उनके पास प्लान 'बी' भी है। यह प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज से गठबंधन है। चिराग के लिए वैशाली जिले की राजापाकर विधानसभा सीट को उपयुक्त माना जा रहा है। सीटों को लेकर चिराग अकारण परेशान नहीं हैं।

    भाजपा, जदयू, लोजपा(रा), हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा अभी एनडीए के घटक हैं। भाजपा और जदयू के बीच न्यूनतम सौ-सौ सीटों का भी बंटवारा होता है तो तीन सहयोगी दलों के लिए 43 सीटें बचेंगी। ये सभी सीटें लोजपा (रा) को दे दी जाए, यह संभव नहीं है।

    लोजपा के लिए अधिकतम 20 से 23 सीटों की गुंजाइश बनती है। यह चिराग के लक्ष्य से काफी कम है। एनडीए ने इसबार 225 सीट जीतने का लक्ष्य रखा है।

    इसके साथ यह भी जोड़ा जा रहा है कि एनडीए 2010 के अपने ही रिकार्ड को तोड़ेगा। 2010 के विस चुनाव में एनडीए के सिर्फ दो घटक थे-भाजपा और जदयू। 243 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 206 सीटें मिली थीं। दावे का यह पक्ष भी लोजपा(रा) को डरा रहा है।

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    कब कितनी सीटें मिली थीं?

    2015 में अविभाजित लोजपा को एनडीए की ओर से चुनाव लड़ने के लिए विधानसभा की 42 सीटें दी गईं थीं। उस समय जदयू बाहर था।लोजपा को सिर्फ दो सीटों पर सफलता मिली। 4.8 प्रतिशत वोट मिला।

    2020 में वह अकेले 134 सीटों पर लड़ी। सिर्फ एक उम्मीदवार की जीत हुई।अधिक सीटों पर लड़ने के कारण उसका वोट 5.66 प्रतिशत हो गया था।

    अलग है प्रतिबद्धता

    गठबंधन के प्रति प्रतिबद्धता के मामले में लोजपा का अतीत अन्य दलों से अलग है। 2009 और 2014 के लोकसभा और 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दें तो यह पार्टी लगातार दो चुनाव किसी गठबंधन के साथ नहीं लड़ी है, इसलिए केंद्र में मंत्री रहने के बावजूद चिराग अगर एनडीए से अलग चुनाव लड़ें तो यह आश्चर्यजनक घटना नहीं होगी।

    2005 के विधानसभा चुनाव में लोजपा अलग चुनाव लड़ी थी। उस समय के पार्टी अध्यक्ष रामविलास पासवान यूपीए की केंद्र सरकार में मंत्री थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में लोजपा यूपीए के साथ लड़ी थी।

    पीके ने कभी विरोध नहीं किया

    बिहार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में प्रशांत किशोर नए उभरे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव-इन सब पर पीके जुबानी हमला करते हैं।

    इन दलों की ओर से भी पीके की आलोचना की जाती है, लेकिन पीके और चिराग या इन दोनों की पार्टी ने कभी एक दूसरे की आलोचना नहीं है।

    पीके का चिराग के प्रति नरमी भी इन चर्चाओं को बल देता है कि चिराग अगर एनडीए से अलग हुए तो पीके के साथ गठबंधन करेंगे। पीके के पास मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं है। एनडीए चिराग को इस पद के लिए प्रस्तावित नहीं करेगा।

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