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    राज्यपाल कोटे से MLC बनेंगे दीपक प्रकाश, उपेंद्र के बेटे के लिए BJP को देनी पड़ी कुर्बानी

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:40 PM (IST)

    पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी बच गई है, वे राज्यपाल कोटे से विधान परिषद सदस्य मनोनीत होंगे। भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के त्यागपत्र के बाद सं ...और पढ़ें

    राज्यपाल कोटे से MLC बनेंगे दीपक प्रकाश

    राज्यपाल कोटे से MLC बनेंगे दीपक प्रकाश

    HighLights

    1. पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का मंत्री पद सुरक्षित हो गया।

    2. वे राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद सदस्य मनोनीत होंगे।

    3. भाजपा एमएलसी देवेश कुमार ने अपना त्यागपत्र सौंप दिया।

    राज्य ब्यूरो, पटना। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी बच गई है। दीपक उच्चसदन जाएंगे। भाजपा के मनोनीत विधान पार्षद देवेश कुमार ने त्यागपत्र दे दिया है। देवेश की जगह दीपक राज्यपाल कोटे से विधान परिषद के सदस्य मनोनीत किए जाएंगे।

    दीपक का कार्यकाल 16 मार्च 2027 तक होगा। विदित हो कि 30 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने बगैर किसी सदन के सदस्य रहते दीपक प्रकाश के मंत्री पद बने रहने को लेकर प्रश्न खड़ा किया था।

    उधर, देवेश शुक्रवार शाम पीछे के दरवाजे से बिहार विधान परिषद पहुंचे और सभापति अवधेश नारायण सिंह को अपना त्याग पत्र सौंप दिया। साथ में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी थे।

    मंत्री पद को लेकर था संवैधानिक संकट

    दीपक प्रकाश वर्तमान में बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वह अभी तक विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं।

    संविधान के अनुसार, किसी भी मंत्री को पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। इसी मुद्दे को लेकर उनके मंत्री पद पर संवैधानिक संकट की स्थिति बन गई थी।

    यह मामला शीर्ष अदालत तक पहुंचा था और कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा था। इसके बाद सरकार ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी शुरू कर दी। दीपक के मनोनयन की घोषणा होते ही संवैधानिक संकट भी समाप्त हो जाएगा।

    विपक्ष खड़े कर रहा था प्रश्न

    दीपक प्रकाश की विधानमंडल सदस्यता को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा था। विपक्षी दलों का कहना था कि संवैधानिक प्रविधान के तहत मंत्री पद पर बने रहने के लिए सदन की सदस्यता आवश्यक है। वहीं, सत्तारूढ़ एनडीए का कहना था कि इस मामले में सभी कदम नियमों के अनुसार उठाए जाएंगे।

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    एनडीए की रणनीति मानी जा रही तैयारी

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी एनडीए की रणनीति का हिस्सा है। सरकार में संतुलन बनाए रखने और मंत्रियों की संवैधानिक स्थिति मजबूत करने के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन देवेश कुमार के त्यागपत्र के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि दीपक प्रकाश शीघ्र ही औपचारिकता पूर्ण कर विधान पार्षद मनोनीत कर दिए जाएंगे।

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