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Bihar Flood: एक पखवाड़े में 3 बार चाल बदल गंगा ने तोड़ा रिकॉर्ड, अब राहत की उम्मीद

Published: Mon, 07 Sep 2026 01:59 PM (IST)

गंगा नदी ने एक पखवाड़े में तीन बार चाल बदलकर पटना में 10 साल का उच्चतम बाढ़ स्तर का रिकॉर्ड ...और पढ़ें

पटना में बाढ़। फोटो जागरण

पटना में बाढ़। फोटो जागरण

HighLights

  1. गंगा ने पटना में 10 साल का बाढ़ रिकॉर्ड तोड़ा।

  2. 24 हजार बाढ़ पीड़ित राहत शिविरों में आश्रित।

  3. राहत शिविरों में भोजन-पानी की सुविधाओं पर शिकायतें।

जागरण संवाददाता, पटना। गंगा ने एक पखवारे में तीन बार चाल बदली और शनिवार को इस कदर उफनाई कि उच्चतम बाढ़ स्तर का 10 वर्ष का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया।

गंगा का जलस्तर यूं तो 21 अगस्त से ही बढ़ना शुरू हो गया था और 25 अगस्त तक डराता रहा लेकिन अचानक 28 अगस्त से इसमें तेजी से कमी दर्ज हुई।

अभी दियारा-निचले इलाकों में रहने वाले व प्रशासन राहत की सांस भी नहीं ले पाया था कि एक सितंबर से फिर जलस्तर बढ़ने लगा। इस बार जलस्तर बढ़ने का क्रम इतना तेज था कि पांचवें दिन शनिवार को उच्चतम जलस्तर का नया रिकॉर्ड बना दिया।

हालांकि, रविवार तड़के तीन बजे से फिर गंगा के जलस्तर में वृद्धि थम गई और सुबह 10 बजे से इसमें गिरावट दर्ज की जाने लगी। शाम तक गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर से घटकर 50.51 मीटर रह गया।

हालांकि, अब भी गंगा सभी प्रमुख गेज स्थल पर खतरे के निशान से डेढ़ मीटर से ऊपर ही बहर रही है। वहीं, पुनपुन में भी तेजी से बढ़ा पानी पटना के लिए दोहरी चुनौती का कारण बना हुआ है। जल संसाधन के आंकड़ों पर आधारित पवन कुमार की रिपोर्ट: 

  Bihar Flood

गंगा उफनाई तो 24 हजार बाढ़ पीड़ित राहत के भरोसे

गंगा के बढ़े जलस्तर ने नदी किनारे बसे इलाकों के करीब 24 हजार लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है। राहत के लिए जनार्दन घाट और मीनार घाट पर आवागमन के लिए 10 नावें लगाई गई हैं।

एसडीआरएफ और पुलिस की टीम सुरक्षा में तैनात है। हालांकि राहत शिविरों में सुविधाओं को लेकर लोगों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।

जेपी गंगा पथ पर बनाए गए राहत शिविर में भोजन की व्यवस्था चीफ एडवाइजर एमएस कुरैशी की देखरेख में की जा रही है। सुबह नौ से 11 बजे और शाम सात से नौ बजे तक भोजन वितरण का समय निर्धारित है।

सुबह-शाम चावल, दाल और सब्जी दी जा रही है। शनिवार को खिचड़ी-चोखा परोसा गया। लोगों ने आरोप लगाया कि खिचड़ी बनाने में खुदिया चावल का इस्तेमाल किया गया। भोजन की मात्रा और वितरण के समय को लेकर भी लोगों ने परेशानी बताई।

महिलाओं ने पिंक शौचालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की। बाढ़ के बीच राहत शिविर में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा में पानी की कमी ने महिलाओं की परेशानी और बढ़ा दी है।

राहत शिविर में चिकित्सा व्यवस्था के लिए डा. संगीता कुमारी और डा. निभा कुमारी की टीम तैनात है। शनिवार को आधे दिन में ही 104 मरीजों की जांच की गई। बुखार, उल्टी सहित सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार दिया गया।

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