गया का ANMMCH बनेगा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, मास्टर प्लान तैयार; अत्याधुनिक हॉस्टल और मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स भी बनेंगे
गया स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एएनएमएमसीएच) को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे मगध क्षेत्र में अत् ...और पढ़ें

अत्याधुनिक छात्रावास और मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स बनेंगे
HighLights
एएनएमएमसीएच को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा।
अत्याधुनिक छात्रावास और मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा।
मगध क्षेत्र में गंभीर बीमारियों का उपचार स्थानीय स्तर पर।
राज्य ब्यूरो, पटना। गया स्थित अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एएनएमएमसीएच) को भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे मगध परिक्षेत्र में अत्याधुनिक उपचार की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी।
गंभीर एवं जटिल बीमारियों के उपचार के लिए अन्य शहरों पर निर्भरता कम होगी और रेफरल की संख्या में कमी आएगी।
बुधवार को एएनएमएमसीएच के पुनर्निर्माण के लिए तैयार किए जा रहे मास्टर प्लान की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और विभागीय सचिव कुमार रवि ने ऐसी मंशा जताई।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार बनेगा मास्टर प्लान
बैठक में अस्पताल परिसर के पुनर्विकास, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, भवन निर्माण, चिकित्सा शिक्षा, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के संदर्भ में चर्चा हुई।
भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान बनाने का निर्देश दिया गया। इसके तहत अस्पताल की मौजूदा सुविधाओं को बेहतर करने के साथ नई चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की योजना तैयार की जा रही है।
अत्याधुनिक छात्रावास और मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स बनेंगे
मास्टर प्लान के अंतर्गत अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त छात्रावास और मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा। वर्तमान छात्रावासों की मरम्मत एवं उन्नयन भी कराया जाएगा।
इसके अलावा अस्पताल परिसर में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा।
अधिकारियों और कार्यदायी एजेंसियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने का निर्देश दिया गया है, हालांकि समय-सीमा स्पष्ट नहीं की गई।
जून में 36 हजार से अधिक मरीजों का OPD उपचार
बैठक में विभागवार क्लीनिकल प्रदर्शन की भी समीक्षा हुई। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, एएनएमएमसीएच में 36,155 ओपीडी मरीजों का उपचार हुआ।
वहीं 2,965 मरीजों को आइपीडी सेवाएं मिलीं। कुल 1,166 आपातकालीन मरीजों का उपचार किया गया। अस्पताल में इस दौरान 460 मेजर ऑपरेशन और 2,693 माइनर ऑपरेशन भी हुए।
छात्रावास की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
एएनएमएमसीएच चिकित्सा शिक्षा और आधारभूत संरचना से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
इनमें छात्रावास की कमी सबसे गंभीर समस्या है। छात्रावास की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण छात्रों का आंदोलन भी हुआ था, जिससे चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हुई।
अस्पताल प्रबंधन के सामने छात्रों को बेहतर आवास उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बनी हुई है।
300 से अधिक MBBS छात्र परिसर से बाहर
छात्रावास क्षमता कम होने के कारण विभिन्न बैचों के 300 से अधिक एमबीबीएस छात्र अभी परिसर के बाहर रह रहे हैं। वर्तमान छात्रावासों का रखरखाव भी पर्याप्त नहीं है।
इसके साथ ही आवारा पशुओं के छात्रावास परिसर में प्रवेश करने की समस्या भी सामने आई है। इससे छात्रों की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को लेकर परेशानी बनी हुई है।
दो परित्यक्त छात्रावासों की मरम्मत लगभग पूरी
दो परित्यक्त छात्रावासों की मरम्मत का काम लगभग पूरा हो चुका है। इनमें तत्काल रूप से करीब 150 छात्रों को आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा।
इससे छात्रावास की कमी की समस्या को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिलेगी। वहीं सिद्धार्थ छात्रावास पर अभी अवैध कब्जा है, जिसे खाली कराने का प्रयास चल रहा है।
सुपर स्पेशियलिटी बनने से कम होगी दूसरे शहरों पर निर्भरता
एएनएमएमसीएच को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किए जाने से मगध क्षेत्र के मरीजों को गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों की ओर कम जाना पड़ेगा।
अस्पताल में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होने से मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद है।
साथ ही रेफरल की संख्या में कमी आने से क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।