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    गुप्त नवरात्र आज से शुरू: आध्यात्मिक रहस्य, साधना, सिद्धि और शक्ति जागरण का विशेष काल

    Updated: Mon, 19 Jan 2026 09:22 AM (IST)

    Gupt Navratri Begins: पटना में माघ गुप्त नवरात्र आज से शुरू हो गया है। यह पर्व आंतरिक साधना, तप और आत्मिक उन्नति के लिए विशेष माना जाता है, जो 28 जनवर ...और पढ़ें

    गुप्त नवरात्र आज से शुरू

    गुप्त नवरात्र आज से शुरू

    HighLights

    1. आज से माघ गुप्त नवरात्र शुरू, आंतरिक साधना का विशेष पर्व।

    2. तंत्र साधना, दस महाविद्याओं की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी।

    3. रोग-शोक मुक्ति, आत्मबल वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर।

    जागरण संवाददाता, पटना। माघ मास के शुक्ल पक्ष के साथ ही आज से गुप्त नवरात्र का शुभारंभ हो गया है। उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में शुरू हो रहा यह नवरात्र साधना, तप और आत्मिक उन्नति का विशेष काल माना जाता है। सामान्य नवरात्र की तरह यह पर्व सार्वजनिक रूप से नहीं, बल्कि आंतरिक साधना और गोपनीय उपासना के लिए जाना जाता है। इसी कारण इसे ‘गुप्त नवरात्र’ कहा गया है। यह नवरात्र 28 जनवरी को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।

    गुप्त नवरात्र का मुख्य उद्देश्य बाहरी आडंबर के बजाय साधक के भीतर शक्ति का जागरण करना होता है। इस दौरान घरों और मंदिरों में कलश स्थापना कर मां शक्ति का आह्वान किया जाता है।

    श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निराहार, फलाहार या एक समय भोजन कर व्रत रखते हैं। इस नवरात्र में संयम, मौन, ब्रह्मचर्य और नियमों का विशेष महत्व होता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना और शक्ति उपासना की प्रधानता रहती है। यह काल तंत्र मार्ग से जुड़े साधकों के लिए अत्यंत सिद्धिदायी माना गया है।

    साधक इस समय मंत्र जप, यंत्र साधना, ध्यान और योग के माध्यम से अपनी मानसिक, आध्यात्मिक और आत्मिक शक्तियों को जाग्रत करने का प्रयास करते हैं। मां वैष्णो देवी, कामाख्या देवी, हिंगलाज देवी और पराम्बा देवी की उपासना इस नवरात्र में विशेष फलदायी मानी जाती है।

    माघ गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना का भी विशेष महत्व है। इन दस महाविद्याओं, मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला, को शक्ति के विभिन्न स्वरूप माना गया है।

    साधक अपनी साधना और मनोकामना के अनुसार किसी एक या एक से अधिक महाविद्याओं की आराधना करते हैं।

    गुप्त नवरात्र में पूजा विधि अपेक्षाकृत गहन और अनुशासनपूर्ण होती है। प्रातःकाल स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीप प्रज्वलित किया जाता है।

    इसके बाद मंत्र जप, ध्यान और पाठ किया जाता है। विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ इस काल में अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। दुर्गा कवच, शतनाम पाठ और विशेष मंत्रों का नियमित जाप रोग-शोक से मुक्ति, मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि करता है।

    धार्मिक मान्यता है कि गुप्त नवरात्र में की गई साधना शीघ्र फल देती है। व्यवसाय में उन्नति, रोजगार, पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक प्रगति के लिए यह काल अत्यंत शुभ माना गया है। यही कारण है कि गुप्त नवरात्र को केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और शक्ति साधना का दुर्लभ अवसर माना जाता है।

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