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    होलिका दहन में प्लास्टिक-टायर जलाने से बचें: प्रदूषण बोर्ड की अपील, स्वास्थ्य पर खतरा

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 04:37 AM (IST)

    होलिका दहन में प्लास्टिक, टायर और कचरा जलाने से गंभीर वायु प्रदूषण होता है, जिससे कैंसर व दमा जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं। बिहार प्रदूषण नियंत्रण पर्ष ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, पटना। होलिका जलाने की परंपरा हमारे समाज में वर्षों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका जलाने का उद्देश्य असत्य पर सत्य की विजय के संदेश को पुनर्जीवित करने के साथ तन, मन को स्वस्थ करने का है।

    वहीं, आज होलिका जलाना बीमारियों को दावत देने जैसा हो गया है। लोग होलिका जलाने के बहाने वाहनों के पुराने टायर, पालीथिन, कूड़ा-कचड़ा आदि डालते हैं। ऐसा करने से इससे निकलने वाले धुएं पर्यावरण को दूषित करने के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव डालता है।

    बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डीके शुक्लासांक ने बताया कि होलिका दहन को लेकर लोगों के बीच नुक्कड़ नाटक के जरिए जागरूकता कार्यक्रम पर्षद की ओर से आयोजित होगी। कलाकार लोगों को अभिनय के जरिए होलिका में प्लास्टिक, टायर, जले मोबिल आदि न डालें इसके लिए जागरूक करेंगे। होलिका के लिए गोबर के उपले, सूखी लकड़ियां, धूप आदि बेहतर विकल्प हैं। यह लोगों की आस्था से जुड़ा है। आस्था के साथ लोग खिलवाड़ नहीं करें।

    डीके शुक्ला ने बताया कि प्लास्टिक जलाने से जहरीली गैस स्वच्छ हवा में घुलती है, जिसमें कार्बन मोनो आक्साइड, फ्यूरान जैसी जहरीली गैस निकलती है। इस गैस से कैंसर, दमा, एलर्जी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। इसके साथ ही पर्यावरण भी प्रदूषित होता है।

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    रबर जलाने से इसके छोटे छोटे कण उड़कर श्वास लेने के रास्ते फेफड़ें में जम जाते हैं। कार्बन मोनो आक्साइड जहरीली गैस होती है जो शरीर में आक्सीजन की सप्लाई कम कर देती है। सल्फर डाइआक्साइड सांस लेने में शरीर के अंदर जलन पैदा करती है।

    होलिका में आम की लकड़ी और धूप डालना शुभ

    होलिका जलाने का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। ज्योतिष आचार्य पीके युग ने बताया कि होलिका बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। होलिका में आम की लकड़ी, कपूर, धूप, गुगुल आदि जलाना शुभ होने के साथ धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। यह न केवल नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मकता लाता है, बल्कि आम की लकड़ी के जलने से वातावरण शुद्ध होता है।

    हिंदू धर्म में आम की लकड़ी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। हवन के लिए यह उपयोगी होता है। कपूर जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। इसकी सुगंध मानसिक शांति प्रदान कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। धूप, गुगुल आदि जलाना सुख-समृद्धि का द्योतक माना जाता है। होलिका दहन के दौरान हरे और जीवित पेड़ों की लकड़ी जलाना अशुभ माना जाता है। हरे पेड़-पौधे जीवन का प्रतीक होने के साथ इसे काटना अशुभ माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवित पेड़ को नुकसान पहुंचाना पाप के समान माना गया है। ऐसे में सूखी और गिरी हुई लकड़ियों का ही उपयोग करना उचित माना जाता है। वृक्षों में पीपल की लकड़ी जलाना अशुभ होता है। होलिका दहन के समय गंदी और अशुद्ध लकड़ी का प्रयोग धर्म शास्त्र में वर्जित है।