IGIMS एमबीबीएस धांधली: जांच रिपोर्ट के बाद सेकेंड प्रोफेशनल परीक्षा रद, कर्मियों पर बड़ी कार्रवाई
इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में एमबीबीएस परीक्षा में धांधली की आधिकारिक पुष्टि हुई है, जिसके बाद सेकेंड प्रोफेशनल परीक्षा रद्द कर दी गई ...और पढ़ें

IGIMS एमबीबीएस धांधली

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जागरण संवाददाता, पटना। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में एमबीबीएस परीक्षा में धांधली की अब आधिकारिक पुष्टि हो गई है। संस्थान की आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सोमवार को मुख्य प्रवक्ता सह उप निदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा द्वारा जारी विज्ञप्ति में अनियमितता की पुष्टि की गई है।
एमबीबीएस सेकेंड प्रोफेशनल की परीक्षा को भी रद कर दिया गया है। परीक्षा शाखा के अधिसंख्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ बड़े पैमाने पर फेरबदल के निर्णय की जानकारी दी गई है।
संस्थान के अधिकारियों ने कमेटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। वरिष्ठ चिकित्सकों व आक्रोशित छात्रों ने जांच रिपोर्ट को मामले की लीपापोती बताया है।
उनका आरोप है कि वीडियो में जिस व्यक्ति का हाथ व घड़ी दिख रही है व एक अन्य मुख्य आरोपित को इसमें शामिल नहीं किया गया है। स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह व स्वास्थ्य विभाग भी मामले की निगरानी कर रहा है।
सात दिनों की जगह एक माह में आई रिपोर्ट
13 मार्च को ई-मेल से परीक्षा में पेपर लीक व पैसों के लेन-देन का मामला सामने आया। इसे पुष्ट करने के लिए वीडियो समेत कई साक्ष्य दिए गए थे। तत्कालीन डीन परीक्षा डॉ. प्रकाश दुबे ने इसे प्राथमिक जांच में सही पाया और आराेपित पर कार्रवाई की मांग की। 15 दिन तक कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने 11 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और आरोप सामने आने के करीब एक माह बाद डा. ओम कुमार की अध्यक्षता में आंतरिक जांच समिति गठित की गई। मामला और गरमाने पर पुन: तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन पीएसएम विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में करते हुए डॉ. ज्ञान भास्कर व डॉ. अश्विनी को सदस्य बनाया गया। समिति को सात कार्य दिवस में रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन रिपोर्ट सौंपने में करीब एक माह का समय लग गया। इस बीच कई प्रशासनिक उलटफेर किए गए और आरोप-प्रत्यारोप स्वास्थ्य विभाग तक पहुंच गए।
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निगरानी व ईओयू से जांच की मांग
मेधावी छात्र इस मामले की निगरानी व ईओयू से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि उत्तर पुस्तिका में हेरफेर के लिए हर छात्र से पेपर लीक व आंसर शीट के लिए अलग-अलग रुपये लिए गए हैं। 40 से अधिक छात्र इस धांधली में शामिल हैं। परीक्षा शाखा के सीसीटीवी में संदिग्ध आवाजाही के संकेत मिले हैं।
प्रारंभिक जांच में उत्तर पुस्तिकाओं पर हस्ताक्षर से जुड़ी अनियमितताएं मिलीं। छात्रों का आरोप है कि यह एक संगठित गड़बड़ी है, इसमें एक-दो नहीं बल्कि कई लोग शामिल हैं। छात्र मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. रंजीत गुहा को भी जांच प्रक्रिया में शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
लीपापोती नहीं, दोषियों पर हो रही कड़ी कार्रवाई
उप निदेशक सह मुख्य प्रवक्ता डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि एमबीबीएस के सेकेंड प्रोफेशनल परीक्षा में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए एमबीबीएस सेकेंड प्रोफेशनल 2025 को रद कर दिया गया है। डीन एग्जामिनेशन सेक्शन के सभी कर्मियों व संबंधित छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा शाखा में तत्काल प्रभाव से बदलाव करते हुए तीन वरिष्ठ फैकल्टी डा. अंजू सिंह, डा. विनोद कुमार व डॉ. सरिता मिश्रा को सब डीन (एक्जाम) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसके अलावा अन्य कर्मचारियों का तबादला किया जा रहा है। छात्रों का जांच में लीपापोती व मुख्य आरोपित को बचाने के आरोप निराधार हैं। जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है। आइजीआइएमएस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की साख व विश्वसनीता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
सेकेंड प्रोफेशनल एमबीबीएस की परीक्षा सबसे कठिन
संस्थान के वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार एमबीबीएस की पढ़ाई सामान्यत: तीन चरण में होती है। पहले में शरीर को समझना यानी एनाटामी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री की पढ़ाई होती है।
दूसरे प्रोफेशनल यानी चरण में छात्र रोग व इलाज को समझते हैं, इसमें पैथोलॉजी यानी रोगों का अध्ययन, माइक्रोबायोलाजी यानी वायरस-बैक्टीरिया-फंगस व संक्रमण और फार्माकोलाजी यानी दवाओं के विज्ञान उनके घटक, कांबिनेशन व रोगों पर प्रभाव का अध्ययन करते हैं। दूसरे प्रोफेशनल की परीक्षा को सबसे कठिन माना जाता है। तीसरे चरण में छात्र दवाओं व सर्जरी से मरीजों का इलाज करना सीखते हैं।