IGIMS में 'दीदी की रसोई' की शुरुआत, अब जीविका दीदियों के हाथ का मिलेगा स्वादिष्ट और स्वच्छ भोजन
आइजीआइएमएस पटना में अब मेडिकल छात्र-छात्राओं को जीविका दीदियों द्वारा तैयार स्वच्छ और स्वादिष्ट भोजन मिलेगा। यह व्यवस्था पहले दो महिला छात्रावासों में ...और पढ़ें

नोटिस के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
HighLights
आइजीआइएमएस में जीविका दीदियों द्वारा संचालित होगा मेस।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत दो महिला छात्रावासों में शुरुआत।
भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई में सुधार का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, पटना। आइजीआइएमएस के मेडिकल छात्र-छात्राओं को अब जीविका दीदियों के हाथ का भोजन मिलेगा। संस्थान ने छात्रावासों के मेस संचालन के लिए जीविका के साथ करार किया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले दो महिला छात्रावासों में दीदी की रसोई शुरू होगी।
एक माह तक छात्राओं से फीडबैक लेने के बाद इसे सभी छात्रावासों में लागू किया जाएगा। इसके साथ ही वर्षों से मेस संचालित कर रही निजी एजेंसी को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आइजीआइएमएस के प्राचार्य प्रो. डा. रंजीत गुहा ने बताया कि वर्तमान में सभी छात्रावासों के मेस का संचालन एक निजी एजेंसी कर रही है।
लंबे समय से भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर छात्रों की शिकायतें मिल रही थीं। कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ऐसे में संस्थान ने मेस संचालन की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को सौंपने का निर्णय लिया है।
जांच में मिलीं कई खामियां
पिछले कुछ माह में छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्राचार्य व निदेशक से लगातार शिकायत की थी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर मेस का निरीक्षण कराया।
जांच में भोजन बनाने से लेकर परोसने तक साफ-सफाई में गंभीर लापरवाही सामने आई। टीम ने यह भी पाया कि सब्जी, दाल, चावल और मसालों सहित कई खाद्य सामग्री निम्न गुणवत्ता की इस्तेमाल की जा रही थी। कुछ मामलों में सड़ी-गली सब्जियों के उपयोग की भी शिकायत सही पाई गई।
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नोटिस के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था
अस्पताल प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर निजी एजेंसी को कई बार नोटिस जारी किया, लेकिन व्यवस्था में संतोषजनक सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद छात्रहित को देखते हुए मेस संचालन की जिम्मेदारी जीविका के स्वयं सहायता समूहों को देने का निर्णय लिया गया।
संस्थान प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो सभी छात्रावासों में दीदी की रसोई संचालित होगी।