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    ‘दलित-मुस्लिम एनकाउंटर पर अलग रवैया क्यों?’ भरत तिवारी मामले में मांझी का हमला

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 01:24 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर पर जाति और धर्म के आधार पर बहस को खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था सर्वोपर ...और पढ़ें

    भरत त‍िवारी एनकाउंटर मामले में जीतन राम मांझी ने साधा निशाना। फाइल

    भरत त‍िवारी एनकाउंटर मामले में जीतन राम मांझी ने साधा निशाना। फाइल

    HighLights

    1. मांझी ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर जातिवाद की निंदा की।

    2. कानून-व्यवस्था सर्वोपरि, आपराधिक घटना को राजनीतिक रंग न दें।

    3. दलित-मुस्लिम एनकाउंटर पर दोहरे मापदंड पर सवाल उठाए।

    राज्य ब्यूरो, पटन। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच मंगलवार को तीखी टिप्पणी की।

    उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को जाति और धर्म के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति खतरनाक है। कानून-व्यवस्था के सवाल पर दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जा सकते। 

    हथ‍ियार उपलब्‍ध कराने वाले की चर्चा क्‍यों नहीं 

    मांझी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सवाल उठाया कि भरत तिवारी के पास अवैध पिस्टल कहां से आई और उसे हथियार उपलब्ध कराने वालों की भूमिका पर चर्चा क्यों नहीं हो रही है।

    उन्होंने कहा कि कुछ लोग एक आपराधिक घटना को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि दलित के एनकाउंटर पर उसे नक्सली और किसी मुस्लिम के एनकाउंटर पर उसे आतंकवादी बताने वाले लोग आज भरत तिवारी प्रकरण में सवाल उठा रहे हैं, तो यह उनके दृष्टिकोण में विरोधाभास को दर्शाता है।

    उन्होंने कहा कि कानून का शासन सर्वोपरि है और देश संविधान के अनुसार चलेगा, न कि हथियारों के बल पर। मांझी ने यह भी कहा कि भरत तिवारी को क्रांतिकारी बताकर उसका महिमामंडन करना उचित नहीं है।

    जात‍ि नहीं, कृत्‍य का हो विराेध या समर्थन 

    उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति के समर्थन या विरोध का आधार उसकी जाति नहीं, बल्कि उसके कृत्य होने चाहिए। उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया पर चल रही कुछ टिप्पणियों पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधा।

    कहा कि तथ्यों की जगह भावनाओं और पूर्वाग्रहों को बढ़ावा देना समाज के लिए नुकसानदेह है। भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस लगातार जारी है।

    एक ओर मामले की जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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