Kharmas 2026: सूर्य का मेष राशि में प्रवेश के साथ खरमास का समापन, मना सत्तुआनी का पर्व
सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ खरमास समाप्त हो गया है। मंगलवार को मेष संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर भगवान का पूजन किया और सत्तुआनी पर ...और पढ़ें

दीघा स्थित पाटीपुल घाट पर सत्तुआनी के अवसर पर गंगा में डुबकी लगाते श्रद्धालु। जागरण
जागरण संवाददाता, पटना। सूर्य के मेष राशि में आने के साथ खरमास का समापन हो गया है। वैशाख कृष्ण द्वाद्वशी मंगलवार को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश कर गए। सूर्य के मेष राशि में जाने के कारण मेष संक्रांति का पर्व मनाया गया।
श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करने के साथ घरों और मंदिरों में भगवान का पूजन कर सत्तुआनी का पर्व मनाया। मेष संक्रांति पर शतभिषा नक्षत्र, शुक्ल योग एवं सिद्ध योग का संयोग बना रहा। श्रद्धालुओं ने सत्तू, आम के टिकोले, गुड़ आदि को प्रसाद के रूप में भगवान को अर्पित करने के प्रसाद ग्रहण किया।
गंगा तटों पर श्रद्धालुओं ने सत्तू, गुड़, चना, पंखा, जल सहित घट, ऋतुफल एवं अन्य वस्तुओं का दान-पुण्य किया। मिथिलांचल का लोक पर्व जुड़ शीतल बुधवार को विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा।
ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि मेष संक्रांति के साथ ग्रीष्म ऋतु का आरंभ हो जाता है। सत्तुआनी को लेकर मठ-मंदिरों में विशेष पूजन के साथ श्रद्धालुओं के बीच पेय पदार्थ वितरित किया गया।
बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद की ओर से चीना कोठी स्थित पर्षद कार्यालय के अलावा राजवंशी नगर स्थित पंचरूपी हनुमान मंदिर, नागाबाबा ठाकुरबाड़ी समेत सभी प्रमुख मठ-मंदिरों में सत्तू का शरबत, गुड़ से बना लड्डू समेत अन्य पदार्थ प्रसाद के रूप में वितरित किए गए।
पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने बताया कि पर्व के मौके पर शहर के अलग-अलग मठ-मंदिरों के 50 स्थानों पर विशेष काउंटर लगाने के साथ लोगों को शर्बत का वितरण किया गया।
पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर के अलावा बांसघाट काली मंदिर, चांदपुर बेला शिव मंदिर समेत अन्य जगहों पर काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मौके पर पंचरूपी हनुमान मंदिर न्यास के सचिव मोहित प्रकाश, न्यास के सदस्य प्रेम कुमार, पंडित अजय झा आदि उपस्थित रहे।