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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    बिहार टीचर्स के लिए नया अपडेट, पढ़ाने में कमजोर हैं तो होंगे चिह्नित; केके पाठक ने दिया आदेश

    By Dina Nath SahaniEdited By: Aysha Sheikh
    Updated: Sun, 22 Oct 2023 08:19 AM (IST)

    KK Pathak शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक ने बिहार के शिक्षकों के लिए नया आदेश जारी कर दिया है। पढ़ाने में कमजोर शिक्षकों को चिह्नित करने के ...और पढ़ें

    बिहार टीचर्स के लिए नया अपडेट, पढ़ाने में कमजोर हैं तो होंगे चिह्नित; केके पाठक ने दिया आदेश
    बिहार टीचर्स के लिए नया अपडेट, पढ़ाने में कमजोर हैं तो होंगे चिह्नित; केके पाठक ने दिया आदेश

    HighLights

    1. पढ़ाने में कमजोर शिक्षकों को चिह्नित करने का आदेश
    2. शिक्षा विभाग ने विद्यालयी निरीक्षी पदाधिकारियों को दिया निर्देश

    राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य के सरकारी प्रारंभिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कमजोर लर्निंग आउटकम यानी पढ़ाने में कमजोर शिक्षकों को चिह्नित किया जाएगा। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने इस संबंध में विद्यालयी निरीक्षी पदाधिकारियों को निर्देश दिया है।

    शिक्षा विभाग ने आंतरिक रिपोर्ट में लगभग चार लाख शिक्षकों में 20 प्रतिशत को बच्चों को पढ़ाने के मामले में कमजोर माना है। इस आधार पर शिक्षकों को प्रशिक्षण के बाद मिले फीडबैक को बनाया है। हालांकि, विभाग ने रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है।

    शिक्षकों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

    अच्छी बात यह कि पढ़ाने में कमजोर शिक्षकों की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण से गुजारा जाएगा, ताकि विभागीय परीक्षा में उन्हें उत्तीर्ण होने का मौका मिल सके। शिक्षकों को यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) के जरिये दिया जाए। जिन्हें विभाग ने वाइब्रेंट एक्सीलेंस संस्थान के रूप तैयार करने का निर्णय लिया है।

    मॉनीटरिंग सेंटर भी होगा स्थापित

    शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को यह प्रशिक्षण नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अपनाए जाने वाले सभी नवाचारों व मानकों के आधार पर देने का फैसला लिया है। इतना ही नहीं, प्रत्येक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में विद्या समीक्षा केंद्र के नाम से एक मॉनीटरिंग सेंटर भी स्थापित होगा।

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    ट्रायल के तौर पर राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद द्वारा इसका मॉडल भी विकसित किया जा रहा है। सभी विद्यालयों की निगरानी अब जिला स्तर से करने की तैयारी हो रही है। इसके लिए प्रत्येक विद्यालयी निरीक्षी पदाधिकारी को जिम्मेदार बनाया जा रहा है।

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