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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 14, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    सुस्‍ती, गले में सूजन हो सकते हैं इस बीमारी के लक्षण, पटना एम्‍स के डाक्‍टरों ने दी महत्‍वपूर्ण सलाह

    By Vyas ChandraEdited By:
    Updated: Mon, 14 Feb 2022 09:51 AM (GMT+05:30)

    एम्स पटना के निदेशक प्रो. सौरभ वार्ष्‍णेय ने कहा कि देश में हाइपोथायराइडिज्म (Hypothyroidism) रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। देश में हर 10व ...और पढ़ें

    पटना एम्‍स में हाइपोथाइराडिज्‍म अवेयरनेस मंथ शुरू। सांकेतिक तस्‍वीर
    पटना एम्‍स में हाइपोथाइराडिज्‍म अवेयरनेस मंथ शुरू। सांकेतिक तस्‍वीर

    पटना, जागरण संवाददाता। एम्स पटना के निदेशक प्रो. सौरभ वार्ष्‍णेय ने कहा कि देश में हाइपोथायराइडिज्म (Hypothyroidism) रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। देश में हर 10वां वयस्क से इससे पीडि़त है। केवल थायराइड क्लीनिक ही नहीं बांझपन, बच्चों के शारीरिक विकास न होने या अन्य लक्षणों के साथ अस्पताल के किसी भी विभाग में इलाज के क्रम में इसकी पुष्टि हो रही है। इस रोग में एक अच्छी बात यह है कि उचित समय पर जांच व उपचार से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। डा. सौरभ वार्ष्‍णेय ने ये बातें नाभिकीय चिकित्सा विभाग की ओर से आयोजित हाइपोथायराइडिज्म अवेयरनेस मंथ के उद्घाटन समारोह में ये बातें कहीं। 

    गर्भावस्‍था के दौरान ख्‍याल रखना जरूरी

    डीन प्रो. डा. उमेश भदानी ने बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह समस्या ज्यादा होती है। गर्भावस्था के दौरान मां के अच्छे स्वास्थ्य व गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास के लिए थायराइड के प्रति सजगता जरूरी है।नाभिकीय चिकित्सा के विभागाध्यक्ष सह थायराइड क्लीनिक के इंचार्ज डा. पंकज कुमार ने बताया कि हाइपोथायराइडिज्म के एक तिहाई रोगियों को इसकी जानकारी तक नहीं होती है। यह रोग इंडोक्राइन थायराइड ग्रंथि में बनने वाले टी-3 व टी-4 थायराइड हार्मोन की कमी, खाने में आयोडीन युक्त नमक का सेवन नहीं करने, ग्वाटरोजन यानी गोभी, शलजम आदि के ज्यादा सेवन, आयरन व अन्य मिनरल की कमी, जीवनशैली में परिवर्तन, पिट्यूटरी ग्लैंड की समस्या, आनुवंशिक कारणों, थायराइड विषाणु संक्रमण, आटो इम्युनिटी आदि कारणों से होता है। इससे वजन बढ़ना, अत्यधिक सुस्ती, थकान, ठंड महसूस होना, पीरियड में अनियमितता, गले में सूजन की समस्या होती है। टीएफटी रक्त जांच व नाभिकीय चिकित्सा के थायराइड स्कैन से इसकी सटीक जांच संभव है। 

    दवा खाने में सावधानी जरूरी  

    डा. पंकज कुमार के अनुसार बहुत से मरीज सही तरीके व नियमित रूप से दवा नहीं लेते हैं। इससे इलाज बाधित होता है। थायराइड हार्मोन सप्लीमेंट लिवो थायराक्सिन को सुबह खाली पेट लेना चाहिए, जिससे शरीर इसे पूरी तरह अवशोषित कर सके। दवा लेने के बाद पौन घंटे तक कुछ नहीं खाना चाहिए। यदि कोई अन्य दवा भी लेनी हो तो उसका समय बदल लेना चाहिए। सर्जरी के दिन भी दवा लेने से मना नहीं किया जाता है।