लोन का झांसा, सिम चोरी और खाते में 1.14 करोड़ का खेल! पटना कारोबारी समेत 3 लोग साइबर ठगी के शिकार
पटना में साइबर अपराधियों ने अलग-अलग तरीकों से तीन लोगों को निशाना बनाया, जिसमें एक कारोबारी से 1.14 करोड़ रुपये की ठगी हुई। लोन का झांसा, सिम चोरी और ...और पढ़ें

48 घंटे में खाते में आए 1.14 करोड़ रुपये
HighLights
पटना में कारोबारी से 1.14 करोड़ की साइबर ठगी।
सिम चोरी, फर्जी लोन का झांसा देकर की गई ठगी।
संदिग्ध लिंक क्लिक व ओटीपी से लाखों रुपये निकाले।
जागरण संवाददाता, पटना। साइबर अपराधियों ने पटना में ठगी के अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बनाया है। एक कारोबारी को लोन दिलाने का झांसा देकर कोलकाता बुलाया गया और उसका मोबाइल व बैंक से जुड़ा सिम चोरी कर लिया गया।
इसके बाद महज 48 घंटे में उसके खाते में करीब 1.14 करोड़ रुपये का लेनदेन कर दिया गया।
पीड़ित कंकड़बाग निवासी कंपनी निदेशक धीरज कुमार को कारोबार के लिए लोन की जरूरत थी। इसी दौरान आदिल नामक व्यक्ति से संपर्क हुआ, जिसने खुद को फाइनेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताया।
लोन दिलाने का भरोसा देकर उसने धीरज को कोलकाता बुलाया और होटल में ठहराया।
मोबाइल और सिम चोरी, फिर शुरू हुआ करोड़ों का खेल
होटल में अगली सुबह धीरज का मोबाइल और सिम गायब मिला। शिकायत करने पर आदिल ने कुछ दिनों में मोबाइल लौटाने की बात कही। बाद में मोबाइल मिलने पर सिम क्षतिग्रस्त था और उसमें कई मैसेज भी डिलीट मिले।
धीरज ने नया सिम जारी कराया तो उन्हें बैंक खाते का पासवर्ड बदला हुआ मिला। इसके बाद बैंक स्टेटमेंट की जांच की गई तो खाते से हुए बड़े वित्तीय लेनदेन का खुलासा हुआ।
48 घंटे में खाते में आए 1.14 करोड़ रुपये
बैंक स्टेटमेंट के अनुसार 21 और 22 जुलाई के बीच धीरज के खाते में कुल 1,14,95,377 रुपये जमा किए गए। इसके तुरंत बाद रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
आरोपी आदिल के फरार होने के बाद धीरज ने मामले की शिकायत की। उन्होंने खाते के इस्तेमाल को लेकर धनशोधन की आशंका जताई है।
मामले में नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और कोलकाता के कस्बा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
महिला के खाते से 11.35 लाख रुपये निकाले
एक अन्य मामले में साइबर अपराधियों ने रिंकी देवी के खाते से 11.35 लाख रुपये निकाल लिए। मूल रूप से कटिहार के कोढ़ा की रहने वाली रिंकी देवी फिलहाल पटना के रूकनपुरा में रहती हैं।
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रिंकी ने पुलिस को बताया कि उन्हें मोबाइल पर खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली। उन्होंने अपने सीए को केवल अकाउंट नंबर और ओटीपी साझा किया था। इसके बाद खाते से रकम की निकासी हो गई। उन्होंने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।
पेंशन कार्ड के नाम पर 7 लाख की ठगी
न्यू महावीर कालोनी निवासी नागेंद्र नाथ को भी साइबर अपराधियों ने निशाना बनाया। उन्हें फोन कर पेंशन कार्ड बनवाने का झांसा दिया गया। बातचीत के दौरान आरोपी ने उनसे एक लिंक पर क्लिक करने को कहा।
नागेंद्र नाथ के अनुसार, उन्होंने न तो कोई ओटीपी साझा किया और न ही बैंक खाते से जुड़ी जानकारी दी। इसके बावजूद लिंक पर क्लिक करने के दौरान उनके खाते से सात लाख रुपये की निकासी हो गई।
एक लिंक पर क्लिक करते ही खाली हो गया खाता
नागेंद्र नाथ को खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिलने के बाद मामले की शिकायत साइबर थाने में की गई। पुलिस अब उस फोन नंबर और लिंक से जुड़े डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है।
वहीं कारोबारी धीरज कुमार के मामले में पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि उनके खाते में इतनी बड़ी रकम कहां से आई और किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई। तीनों मामलों में साइबर अपराधियों ने अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया है।
साइबर अपराध में अलग-अलग तरीके अपना रहे बदमाश
इन मामलों से साफ है कि साइबर अपराधी सिर्फ ओटीपी या बैंकिंग डिटेल हासिल करके ही ठगी नहीं कर रहे, बल्कि सिम चोरी, फर्जी लोन का झांसा और लिंक पर क्लिक कराने जैसे तरीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस ने मामलों की जांच शुरू कर दी है। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक से जुड़ी जानकारी साझा करने, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या मोबाइल-सिम किसी दूसरे व्यक्ति के हवाले करने से बचना जरूरी है।