नेपाल बॉर्डर से सोशल मीडिया तक... उत्तर बिहार में पाकिस्तानी हैंडलर्स का जाल, NIA-ATS अलर्ट
उत्तर बिहार और सीमांचल में पाकिस्तानी कनेक्शन के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, मार्च 2026 से अब तक कई संदिग्ध गिरफ्तार हुए है ...और पढ़ें

एक-एक संदिग्ध की तैयार हो रही डिजिटल कुंडली
HighLights
मार्च 2026 से अब तक आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध गिरफ्तार।
पाकिस्तानी हैंडलर्स सोशल मीडिया से युवाओं को फंसा रहे।
NIA-ATS ने जांच तेज की, नेपाल सीमा पर चौकसी बढ़ी।
राज्य ब्यूरो, पटना। उत्तर बिहार और सीमांचल में लगातार सामने आ रहे पाकिस्तानी कनेक्शन के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मार्च 2026 से अब तक आधा दर्जन से अधिक संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से चार गिरफ्तारियां केवल पिछले एक महीने के भीतर हुई हैं।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद बिहार एटीएस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी निगरानी और जांच तेज कर दी है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन मामलों के तार आपस में कितने जुड़े हुए हैं।
एक-एक संदिग्ध की तैयार हो रही डिजिटल कुंडली
जांच एजेंसियां पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों की पूरी प्रोफाइल तैयार कर रही हैं। उनकी ट्रैवल हिस्ट्री, मोबाइल फोन, इंटरनेट गतिविधियों और अन्य डिजिटल उपकरणों की गहन जांच की जा रही है।
इस बात की पड़ताल भी हो रही है कि कहीं इन मामलों के पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। केंद्रीय एजेंसियां भी जांच के हर पहलू पर नजर बनाए हुए हैं।
सोशल मीडिया बना नया हथियार
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर मामलों में युवाओं के पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में आने का जरिया सोशल मीडिया बना है।
व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम समेत कई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को फंसाने की कोशिश की जा रही है।
कभी पैसे का लालच देकर तो कभी हथियार उपलब्ध कराने का झांसा देकर उन्हें बरगलाया जा रहा है।
जांच में यह भी सामने आया है कि संवेदनशील जगहों की तस्वीरें और वीडियो मंगवाए जा रहे थे।
हथियार तस्करों के नेटवर्क से भी जुड़े मिले कुछ तार
सुरक्षा एजेंसियों को जांच के दौरान कुछ मामलों में हथियार तस्करी के नेटवर्क से जुड़े सुराग भी मिले हैं।
ऐसे मामलों की अलग से गहन जांच की जा रही है।
एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन गतिविधियों का मकसद केवल सूचनाएं जुटाना था या फिर कोई बड़ी साजिश रची जा रही थी। इसी कारण सीमावर्ती जिलों में निगरानी और बढ़ा दी गई है।
सीतामढ़ी और कटिहार से हाल में हुई बड़ी गिरफ्तारियां
जुलाई 2026 में सीतामढ़ी से मोहम्मद अखलाक और मोहम्मद अरमान को गिरफ्तार किया गया था। इन पर सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टरों के संपर्क में रहकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश रचने का आरोप है।
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इसी महीने कटिहार के मुसापुर गांव से मोहम्मद अहद को भी गिरफ्तार किया गया। उस पर संवेदनशील स्थानों की जानकारी साझा करने का आरोप है।
मधुबनी और मुजफ्फरपुर से भी सामने आए कनेक्शन
जून 2026 में मधुबनी से मौलाना इजहारुल हक को पकड़ा गया था। उस पर पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में रहकर कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।
वहीं मुजफ्फरपुर से मई और मार्च में दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तारियां हुई थीं। इन मामलों में भी संवेदनशील सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की जानकारी साझा करने के आरोप लगे हैं।
नेपाल सीमा पर बढ़ाई गई चौकसी
एडीजी विधि-व्यवस्था केएस अनुपम ने बताया कि हाल के दिनों में कई संदिग्धों की गिरफ्तारी जांच एजेंसियों के इनपुट के आधार पर की गई है।
उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर सतर्कता बढ़ा दी गई है और लगातार निगरानी रखी जा रही है। पूरे मामले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय भी नजर बनाए हुए है।
साथ ही मादक पदार्थों की तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों पर भी कार्रवाई जारी है।