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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Nitish Kumar: नीतीश की 'पलटी' ने बदला बिहार का सियासी समीकरण; अब महागठबंधन में वैकेंसी, NDA हाउसफुल

    Updated: Mon, 29 Jan 2024 02:57 PM (IST)

    नीतीश की पलटी ने सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल दिया है। एनडीए के खेमे में अभी तक बड़ी पार्टी के रूप में सिर्फ भाजपा थी। इसके अलावा हम लोजपा के दोनों ग ...और पढ़ें

    नीतीश की 'पलटी' ने बदला बिहार का सियासी समीकरण; अब महागठबंधन में वैकेंसी, NDA हाउसफुल
    नीतीश की 'पलटी' ने बदला बिहार का सियासी समीकरण; अब महागठबंधन में वैकेंसी, NDA हाउसफुल

    कुमार रजत, पटना। जदयू की एनडीए (नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस) में वापसी ने बिहार का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिया है। इसके साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों गठबंधनों का गणित भी बदल गया है। एनडीए के खेमे में अभी तक बड़ी पार्टी के रूप में सिर्फ भाजपा थी। इसके अलावा हम, लोजपा के दोनों गुट और रालोजद जैसे छोटे दल थे मगर जदयू की एंट्री ने सीटों की बड़ी हिस्सेदारी छीन ली है।

    वहीं दूसरी ओर महागठबंधन में जदयू-राजद के होने से कांग्रेस और वामदलों की दावेदारी कमजोर थी मगर अब मैदान खाली है। महागठबंधन इस खाली जगह को भरने के लिए मुकेश सहनी की वीआइपी या ओवैसी की एआइएमआइएम जैसे दलों को अपने साथ जोड़ सकता है। वर्ष 2019 में हुए पिछले लोकसभा चुनाव को देखें तो एनडीए के लिए सीट बंटवारा अधिक मुश्किल नहीं था। लोकसभा की कुल 40 सीटों में भाजपा और जदयू को 17-17 सीटें मिली थीं जबकि लोजपा को छह सीटें दी गई थीं।

    एनडीए के लिए भी चुनौती

    इस बार जदयू-भाजपा के साथ लोजपा दो खेमे में बंट गई है। अगर छह जीती सीटों पर चिराग और पशुपति पारस वाले दोनों खेमों को मना भी लिया जाए तो जीतन राम मांझी की हम और उपेन्द्र कुशवाहा की रालोजद के लिए सीट निकालने की चुनौती होगी।

    हम और रालोजद को एक-एक सीट पिछले लोकसभा चुनाव में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) महागठबंधन का हिस्सा था। उस समय पार्टी ने तीन सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और तीनों पर हार का सामना करना पड़ा। इस बार दलों की भीड़ में हम को एक सीट से अधिक मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही। वह एक सीट भी गया की हो सकती है, जिसपर जीतन राम मांझी या उनके बेटे संतोष कुमार सुमन चुनाव लड़ सकते हैं।

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    पिछली बार उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) को महागठबंधन ने पांच सीटें दी थीं। कारण, उनके पास तीन सीटिंग सांसद थे। हालांकि सभी पांच सीटों पर रालोसपा को हार का सामना करना पड़ा था। इस बार उनके दल का नाम राष्ट्रीय लोक जनता दल (रालोजद) है। इस बार कुशवाहा के पास एक भी सांसद नहीं है। ऐसे में दावेदारी पहले से कमजोर है। एनडीए उनको साथ रखना चाहती है। ऐसे में काराकाट की सीट दी जा सकती है।

    • 2019 में एनडीए में सीटों का बंटवारा - भाजपा- 17, जदयू-17, लोजपा-छह
    • 2019 में महागठबंधन में सीटों का बंटवारा - राजद-19, कांग्रेस-9, रालोसपा-5, हम-3, वीआइपी-3, आरा सीट पर राजद ने भाकपा-माले को समर्थन दिया था। वहीं, लेफ्ट फ्रंट अलग 17 सीटों पर लड़ा था। सीपीआइएमएल, सीपीआइ, सीपीआइएम, आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक, सोशलिस्ट सेंटर आदि।

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