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    16 मार्च को जीत, 30 मार्च को इस्तीफा, अब CM पद छोड़ेंगे नीतीश कुमार; अगले कदम पर टिकी सबकी नजर

    Updated: Fri, 10 Apr 2026 01:12 PM (IST)

    Bihar Politics: नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। अब उनका अगला कदम मुख्यम ...और पढ़ें

    राज्‍यसभा की शपथ लेते मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार।

    राज्‍यसभा की शपथ लेते मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार।

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    राज्य ब्यूरो, पटना। Nitish Kumar: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। उपराष्‍ट्रपत‍ि सीपी राधाकृष्‍णन ने उन्हें राज्यसभा की सदस्यता की शपथ दिलाई।

    मौके पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, जल संसाधन मंत्री वि‍जय चौधरी और ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी भी मौजूद रहे।

    अब अगला कदम मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अगला कदम पद से इस्तीफा देना होगा। गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि राज्यसभा की शपथ लेने के बाद पटना लौटकर वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।

    उनके इस्तीफे के साथ ही बिहार में करीब 21 वर्षों का उनका शासनकाल समाप्त हो जाएगा।

    30 मार्च को विधान परिषद से दिया था इस्तीफा

    पिछले महीने 30 मार्च को नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह पहली बार वर्ष 2006 में विधान परिषद के सदस्य बने थे और लगातार चार बार इस सदन में रहे।

    वर्ष 2024 में शुरू हुआ उनका कार्यकाल 2030 तक था, लेकिन उन्होंने 2026 में ही इस्तीफा दे दिया।

    Nitish 1

    (शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार को शुभकामना देते उपराष्‍ट्रपत‍ि।)

    16 मार्च को राज्यसभा के लिए हुए थे निर्वाचित

    नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। वैधानिक रूप से उन्हें 30 मार्च तक विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी थी, अन्यथा उनका निर्वाचन रद हो सकता था।

    खुद की इच्छा थी राज्यसभा जाने की

    नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यसभा जाना उनकी व्यक्तिगत इच्छा थी। वह पहले ही तीनों सदनों में रह चुके हैं, इसलिए राज्यसभा का अनुभव लेना चाहते थे।

    उन्होंने कहा कि भले ही वह दिल्ली जाएंगे, लेकिन बिहार पर उनकी नजर बनी रहेगी। वह सरकार के कामकाज के साथ-साथ जदयू के संगठन पर भी ध्यान देंगे।

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