निशांत बने हेल्थ मिनिस्टर: तेजप्रताप के बाद अब नीतीश के बेटे की एंट्री से छिड़ी 'सेम टू सेम' राजनीति की बहस
निशांत कुमार को बिहार का स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त किया गया है, जिससे राज्य में परिवारवाद बनाम राजनीतिक उत्तराधिकार की बहस तेज हो गई है। आरजेडी ने इस न ...और पढ़ें

निशांत कुमार
HighLights
निशांत कुमार बिहार के नए स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त।
तेज प्रताप यादव से तुलना पर परिवारवाद की बहस।
आरजेडी ने जेडीयू-बीजेपी पर कसा तंज।
डिजिटल डेस्क,पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद बनाम राजनीतिक उत्तराधिकार की बहस तेज हो गई है। वजह बने हैं मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar, जिन्हें पहली बार बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि करीब एक दशक पहले जब Lalu Prasad Yadav के बड़े बेटे Tej Pratap Yadav की सरकार में एंट्री हुई थी, तब उन्हें भी स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मिली थी। अब उसी फैसले की याद दिलाकर आरजेडी जेडीयू और बीजेपी पर निशाना साध रही है।
तेजप्रताप को भी मिला था हेल्थ विभाग
वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद जब बिहार में महागठबंधन की सरकार बनी थी, तब नीतीश कुमार ने तेजप्रताप यादव को स्वास्थ्य मंत्री बनाया था। उस समय तेजप्रताप यादव की उम्र करीब 27 वर्ष थी और वे पहली बार मंत्री बने थे।
अब 2026 में वही स्वास्थ्य विभाग निशांत कुमार को मिलने के बाद विपक्ष इसे “राजनीतिक दोहराव” बता रहा है। सोशल मीडिया पर आरजेडी समर्थकों ने “सेम टू सेम राजनीति” का नारा भी उछालना शुरू कर दिया है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि जिस परिवारवाद को लेकर जेडीयू और बीजेपी वर्षों तक आरजेडी पर हमला करती रही, अब वही सवाल उनके सामने खड़े हो रहे हैं।
निशांत की एंट्री से बदला राजनीतिक समीकरण
लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत कुमार ने हाल के महीनों में सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रियता बढ़ाई थी। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
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अब स्वास्थ्य मंत्री बनाए जाने के बाद साफ माना जा रहा है कि जेडीयू भविष्य की राजनीति के लिए नया चेहरा तैयार कर रही है। स्वास्थ्य जैसा बड़ा विभाग देकर पार्टी ने सीधे तौर पर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
हालांकि जेडीयू और बीजेपी की ओर से इसे 'योग्यता आधारित जिम्मेदारी' बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे परिवारवाद का नया अध्याय कह रहा है।
आरजेडी का तंज- 'संघर्षशील सुपुत्र को बधाई'
निशांत कुमार के मंत्री बनने के बाद आरजेडी ने सोशल मीडिया पर तंज कसा। पार्टी की ओर से पोस्ट कर लिखा गया कि 'परिवारवाद पर आजीवन लेक्चर देने वाले कुर्सी कुमार के सुयोग्य सुपुत्र को मंत्री बनने की शुभकामनाएं।'
आरजेडी ने एक पोस्टर भी साझा किया, जिसमें व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा गया कि “लगभग 500 वर्षों से जमीन पर संघर्ष कर रहे और 140 करोड़ वोटों से जीतकर आने वाले निशांत कुमार को बधाई।”
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर जेडीयू और आरजेडी समर्थकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
छह महीने में बनना होगा विधायक या पार्षद
निशांत कुमार फिलहाल बिहार विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक नियमों के तहत मंत्री बने रहने के लिए उन्हें छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि निशांत कुमार विधानसभा का रास्ता चुनेंगे या विधान परिषद के जरिए सदन में एंट्री करेंगे।
बिहार की राजनीति में निशांत कुमार की यह एंट्री सिर्फ एक मंत्री पद तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे जेडीयू की भावी राजनीति और नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
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