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    बिहार में छात्रों के हंगामे से थम गई रेल की रफ्तार, पाटलिपुत्र जंक्शन पर 11 घंटे तक लेट पहुंचीं ट्रेनें

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 10:21 PM (IST)

    पाटलिपुत्र जंक्शन पर परीक्षार्थियों के हंगामे से रेल परिचालन व्यापक रूप से प्रभावित हुआ, जिससे कई ट्रेनें घंटों विलंब से चलीं और यात्रियों को भारी परे ...और पढ़ें

    पाटलिपुत्र स्टेशन पर पथराव करते छात्रों को खदेड़ती पुलिस। सौ : वीडियो ग्रैब।

    पाटलिपुत्र स्टेशन पर पथराव करते छात्रों को खदेड़ती पुलिस। सौ : वीडियो ग्रैब।

    HighLights

    1. पाटलिपुत्र जंक्शन पर परीक्षार्थियों के हंगामे से रेल परिचालन बाधित।

    2. कई ट्रेनें 11 घंटे तक विलंब से चलीं, यात्री परेशान।

    3. परीक्षा व्यवस्था की खामियों और बेरोजगारी को ठहराया जिम्मेदार।

    जागरण संवाददाता, पटना। पाटलिपुत्र जंक्शन पर शनिवार को परीक्षार्थियों के हंगामे और उसके बाद उत्पन्न अव्यवस्था का असर रेल परिचालन पर भी व्यापक रूप से पड़ा। स्टेशन परिसर में हुई अफरा-तफरी और ट्रेनों के संचालन में आई बाधा के कारण कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का समय प्रभावित हुआ।

    यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा तथा विभिन्न दिशाओं में जाने वाली ट्रेनों के परिचालन में देरी दर्ज की गई। पाटलिपुत्र जंक्शन पर 11:25 बजे सीमांचल एक्सप्रेस आनंद बिहार से पहुंची। हंगामे के कारण यह ट्रेन छह घंटे 35 मिनट विलंब से सुबह छह बजे रवाना हुई।

    सबसे अधिक प्रभावित ट्रेन संख्या 09152 मधुबनी–उधना समर स्पेशल एक्सप्रेस रही, जो निर्धारित समय से करीब 11 घंटे विलंब से चली। वहीं, 12142 पाटलिपुत्र–मुंबई एक्सप्रेस एक घंटा 20 मिनट, 11402 सुपौल–पुणे एक्सप्रेस दो घंटे चार मिनट, 11401 पुणे–सुपौल एक्सप्रेस 35 मिनट, 13212 दानापुर–जोगबनी इंटरसिटी एक्सप्रेस 40 मिनट तथा 22355 पाटलिपुत्र–चंडीगढ़ एक्सप्रेस करीब 15 मिनट विलंब से संचालित हुई। 15232 गोंदिया–बरौनी एक्सप्रेस के परिचालन पर भी असर पड़ा।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार हंगामे के दौरान स्टेशन पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ समय तक ट्रेनों के परिचालन को प्रभावित करना पड़ा, जिसका असर बाद की ट्रेनों पर भी पड़ा। देरी के कारण प्लेटफार्मों पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई और उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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    हंगामे के लिए व्यवस्था की विफलता जिम्मेदार

    पाटलिपुत्र जंक्शन पर हंगामे और तोड़फोड़ की घटना को लेकर बिहार डेली पैसेंजर्स एसोसिएशन और पैसेंजर वेलफेयर एसोसिएशन ने परीक्षा आयोजन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    संगठन के प्रतिनिधि प्रोफेसर प्रसिद्ध यादव और संजय तिवारी ने कहा कि कानून-व्यवस्था के लिहाज से तोड़फोड़ और हिंसा उचित नहीं ठहराई जा सकती, लेकिन इस घटना के पीछे परीक्षा आयोजित करने वाले तंत्र की लापरवाही, अदूरदर्शिता और राज्य में बढ़ती बेरोजगारी प्रमुख कारण हैं।

    संजय तिवारी ने कहा कि पटना जंक्शन और अन्य प्रमुख स्टेशनों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए लंबे समय से दानापुर, फुलवारीशरीफ, राजेंद्र नगर टर्मिनल, गुलजारबाग, पटना साहिब और परसा बाजार स्टेशनों पर अधिक एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग की जा रही है।

    इस संबंध में रेलवे को कई बार आवेदन दिए गए और बैठकों में भी मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसके कारण भीड़ प्रबंधन की समस्या लगातार बनी हुई है।

    प्रोफेसर प्रसिद्ध यादव ने कहा कि परीक्षा केंद्र अभ्यर्थियों के गृह जिलों से 400 से 500 किलोमीटर दूर तक आवंटित किए गए, जिससे उत्तर बिहार के छात्रों को दक्षिण बिहार और दक्षिण बिहार के छात्रों को अन्य दूरस्थ जिलों में जाना पड़ा।

    भीषण गर्मी के बीच यह व्यवस्था पूरी तरह अव्यावहारिक साबित हुई। लगभग पांच लाख अभ्यर्थियों की आवाजाही की जानकारी होने के बावजूद रेलवे और प्रशासन ने पहले से पर्याप्त परीक्षा स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था नहीं की। हंगामे के बाद ट्रेनों की घोषणा की गई, लेकिन उनके परिचालन में भी विलंब हुआ, जिससे परीक्षार्थियों में परीक्षा छूटने की आशंका बढ़ गई।

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