पटना में गंगा और पुनपुन नदी रिकॉर्ड तोड़ने के करीब, बाढ़ को लेकर हाई अलर्ट पर प्रशासन
पटना में गंगा और पुनपुन नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है और ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ ...और पढ़ें
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पटना के घाट। फोटो जागरण
HighLights
गंगा-पुनपुन का जलस्तर ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर के करीब।
गांधीघाट, हाथीदह, मनेर में रिकॉर्ड टूटने का खतरा।
प्रशासन ने 31 अतिसंवेदनशील, 181 संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई।
जागरण संवाददाता, पटना। गंगा व पुनपुन में उफान की गति शुक्रवार को गुरुवार की तुलना में धीमे सही लेकिन बाढ़ के पुराने उच्चतम स्तर को तोड़ने की ओर अग्रसर रहा।
शुक्रवार रात आठ बजे तक सबसे तेज वृद्धि पुनपुन के श्रीपालपुर में 27 सेंटीमीटर रही। वहीं गंगा में हाथीदह में 18, दीघा घाट में 11, गांधीघाट में छह और मनेर में पांच सेंटीमीटर जलस्तर बढ़ा।
गांधीघाट व हाथीदह में गंगा का पानी पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर से सिर्फ 13 व 20 सेंटीमीटर ही नीचे है। मनेर में यह अंतर 27 सेंटीमीटर है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गुरुवार रात आठ बजे गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 50.33 मीटर था जो शुक्रवार को इसी समय 50.39 मीटर हो गया।

गांधीघाट का गुरुवार को गंगा का जलस्तर बाढ़ से 19 सेंटीमीटर नीचे था जो शुक्रवार को घटकर 13 सेमी नीचे 50.52 मीटर रहा। वहीं, अधिकारी गंगा के जलस्तर में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी होने से कल तक इसके और कम होने की संभावना जता रहे हैं।
सबसे बड़ी चिंता, पुराने रिकॉर्ड की ओर बढ़ता पानी
जिले में गंगा और पुनपुन का पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। चिंता की बात यह है कि कई जगहों पर जलस्तर अपने ऐतिहासिक उच्चतम बाढ़ स्तर के करीब है।
गांधीघाट में 13 सेंटीमीटर, हाथीदह में 20 सेंटीमीटर और मनेर में 27 सेंटीमीटर का अंतर बचा है। यदि जलस्तर में वृद्धि नहीं थमी तो पुराना रिकॉर्ड टूट जाएगा।
यही कारण है कि 31 अतिसंवेदनशील व 181 संवेदनशील जगहों पर निगरानी व बाढ़ सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं। इसी खतरे को देखते हुए सुरक्षा दीवार के सभी 108 रास्ते, 13 स्लुइस गेट के लीकेज बंद करा दिए गए हैं। संवेदनशील घाटों, तटबंधों व जलनिकासी बिंदुओं की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी गई है।
गंगा-पुनपुन के दोहरे खतरे से लोग बेचैन
हाथीदह में गुरुवार रात आठ बजे गंगा का जलस्तर 43.14 मीटर था जो 24 घंटे में बढ़कर 43.32 मीटर हो गया। यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 43.52 मीटर है।
मौजूदा जलस्तर इससे 20 सेंटीमीटर नीचे है। गुरुवार को यह अंतर 38 सेंटीमीटर था। मनेर में एक दिन में यह 53.47 मीटर से बढ़कर 53.52 मीटर पहुंच गया।
यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 53.79 मीटर है। यह भी गंभीर संकेत है क्योंकि सोन और गंगा के संगम क्षेत्र मनेर में जलस्तर बढ़ने का असर गंगा की धारा पर पड़ता है। दीघा घाट पर 24 घंटे में 51.64 मीटर से बढ़कर गंगा का जलस्तर 51.75 मीटर हो गया। यहां उच्चतम बाढ़ स्तर 52.52 मीटर है।
श्रीपालपुर में पुनपुन का जलस्तर सबसे तेज बढ़ा। यहां एक दिन में 52.96 मीटर से बढ़कर 53.23 मीटर हो गया। यहां पानी खतरे के निशान से करीब 2.63 मीटर ऊपर है।
हालांकि, उच्चतम बाढ़ स्तर 53.91 मीटर से करीब 68 सेंटीमीटर नीचे है। पुनपुन में पानी बढ़ने का असर निचले इलाकों में पहले दिखाई देता है। कई गांवों में सड़क, घरों व खेतों तक में पानी घुस चुका है।
एक नजर में 24 घंटे का बदलाव
| स्थान | 3 सितंबर रात 8 बजे | 4 सितंबर रात 8 बजे | 24 घंटे में वृद्धि | उच्चतम बाढ़ स्तर से दूरी |
|---|---|---|---|---|
| हाथीदह | 43.14 मीटर | 43.32 मीटर | 18 सेमी | 20 सेमी |
| दीघा घाट | 51.64 मीटर | 51.75 मीटर | 11 सेमी | 77 सेमी |
| गांधीघाट | 50.33 मीटर | 50.39 मीटर | 6 सेमी | 13 सेमी |
| मनेर | 53.47 मीटर | 53.52 मीटर | 5 सेमी | 27 सेमी |
| पुनपुन श्रीपालपुर | 52.96 मीटर | 53.23 मीटर | 27 सेमी | 68 सेमी |
कहां खतरे के निशान से कितना ऊपर पानी?
गांधीघाट : खतरे के निशान से 1.79 मीटर ऊपर
हाथीदह : खतरे के निशान से 1.56 मीटर ऊपर
मनेर : खतरे के निशान से 1.52 मीटर ऊपर
दीघा घाट : खतरे के निशान से 1.30 मीटर ऊपर
श्रीपालपुर : खतरे के निशान से 2.63 मीटर ऊपर
एक नजर में बाढ़ की विभीषिका
फल्गु की सहायक महतमाईन व लोकाईन समेत अन्य सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से दनियावां प्रखंड में जमींदारी बांध और तटबंध के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। किसमिरिया गांव के समीप तटबंध टूटने से किशमिरिया, चकरजा, मुड़ेरा, मकसूदपुर, बांकीपुर और मछरियावां समेत कई गांवों के खेत जलमग्न और करीब चार सौ एकड़ क्षेत्र में लगी धान की फसल डूब गई है।
ग्रामीणों व किसानों ने लगभग डेढ़ घंटे तक बिहटा-सरमेरा एसएच-78 को जाम किया। डीएम ने युद्धस्तर पर टूटे बांध की मरम्मत कराने का निर्देश दिया है। पानी का बहाव तेज होने से बोरियां रखने से पानी नहीं रुक रहा था। अब देर रात तक तटबंध की मरम्मत का प्रयास किया जाएगा।
दानापुर के देवनानाला पर जलस्तर खतरा के निशान से चार फीट ऊपर हो गया। दियारा की छह पंचायत व सारण की एक पंचायत के गांव में पानी प्रवेश कर गया है। मंदिर, स्कूल या स्वास्थ्य केंद्रों में पानी घुसा। राहत शिविर में करीब 500 लोगों ने खाना खाया जबकि 70 प्रभावित परिवार व 178 मवेशी हैं।
मोकामा में नदी स्नान पर अगले आदेश तक रोक। जंजीरा दियारा,कसहा दियारा,मोकामा के रामपुर-डूमरा,ताजपुर,शेरपुर और पचमहला के निचले इलाकों में भी गंगा का पानी फैला है। मोकामा नगर का तपस्वी गंगा मार्ग जलमग्न।
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