ट्रेडमार्क विवाद में पटना हाई कोर्ट का फैसला, 'जॉनसन' नाम के उपयोग पर रोक
पटना हाई कोर्ट ने 'जॉनसन' ट्रेडमार्क विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए "जॉनसन पेंट्स प्राइवेट लिमिटेड" को 'जॉनसन' नाम के उपयोग पर अंतरिम रोक लगा द ...और पढ़ें

ट्रेडमार्क विवाद में पटना हाई कोर्ट का फैसला, 'जॉनसन' नाम के उपयोग पर रोक
HighLights
पटना हाई कोर्ट ने 'जॉनसन' नाम के उपयोग पर रोक लगाई।
यह फैसला पेंट कारोबार के ट्रेडमार्क विवाद से संबंधित है।
अदालत ने उपभोक्ता भ्रम और ब्रांड साख को महत्व दिया।
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने पेंट कारोबार से जुड़े चर्चित ‘जॉनसन’ ट्रेडमार्क विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए “जॉनसन पेंट्स प्राइवेट लिमिटेड” को ‘जॉनसन’ नाम के उपयोग पर अंतरिम रोक लगा दी है।
अदालत ने प्रतिवादी कंपनी समेत उसके निदेशकों, अधिकारियों, एजेंटों, डीलरों, वितरकों और उससे जुड़े सभी व्यक्तियों को समान या भ्रामक रूप से मिलते-जुलते ट्रेडमार्क, लेबल, लोगो या ट्रेड ड्रेस के तहत उत्पादों के निर्माण, विज्ञापन, बिक्री और भंडारण से प्रतिबंधित कर दिया है।
इस विवाद में एक ओर 1987 से ‘जॉनसन’ ब्रांड का दावा करने वाली जॉनसन पेंट्स कंपनी है, जबकि दूसरी ओर 2009 में बनी जॉनसन पेंट्स प्राइवेट लिमिटेड भी इसी नाम से कारोबार कर रही है।
न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद एवं न्यायाधीश प्रवीण कुमार की खंडपीठ ने जॉनसन पेंट्स कंपनी की अपील पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। वादी ने वाणिज्यिक न्यायालय, पटना के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें अंतरिम निषेधाज्ञा देने से इनकार किया गया था।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने उपभोक्ताओं में भ्रम की संभावना, वादी की स्थापित साख (गुडविल) और संभावित अपूरणीय क्षति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
अदालत ने माना कि यदि प्रतिवादी को ‘जॉनसन’ नाम से कारोबार जारी रखने दिया गया, तो इससे उपभोक्ताओं के बीच धोखे और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रेडमार्क विवादों में ब्रांड पहचान और बाजार में प्रतिष्ठा की सुरक्षा सर्वोपरि है। ऐसे मामलों में यदि अंतरिम स्तर पर रोक नहीं लगाई गई, तो वादी को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई बाद में संभव नहीं होगी।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला उपभोक्ता भ्रम और धोखाधड़ी की आशंका से जुड़ा है, इसलिए न्यायहित में निषेधाज्ञा देना आवश्यक है।