'पहले अतिक्रमणकारी को पैदा करते हैं, फिर उनके पीछे भागते हैं', पटना हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
पटना हाईकोर्ट ने बिहार न्यायिक अकादमी के आसपास अवैध अतिक्रमण और सुरक्षा व्यवस्था पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। ...और पढ़ें
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पटना हाई कोर्ट। (फाइल फोटो)
HighLights
हाईकोर्ट ने न्यायिक अकादमी के अतिक्रमण पर सरकार से रिपोर्ट मांगी।
अदालत ने प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की, कार्रवाई के निर्देश।
अतिक्रमण हटाने, पुलिस चौकी और हरित पट्टी बनाने के आदेश।
जागरण संवाददाता, पटना। पटना हाईकोर्ट ने बिहार न्यायिक अकादमी के आसपास अवैध अतिक्रमण और सुरक्षा व्यवस्था के मामले में राज्य सरकार एवं संबंधित एजेंसियों से अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
सुनवाई के दौरान कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायाधीश सुधीर सिंह एवं न्यायाधीश राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले आप ही शैतान पैदा करते हैं और फिर उसके पीछे भागते हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि जिला प्रशासन और पटना नगर निगम ने न्यायिक अकादमी के आसपास बने अवैध अस्थायी पार्किंग स्थल एवं अन्य अतिक्रमणों को हटाया है।
अतिक्रमणकारियों से जुर्माना भी वसूला गया है। अदालत को यह भी अवगत कराया गया कि दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए अकादमी के उत्तरी द्वार पर स्थायी पुलिस आउटपोस्ट स्थापित किया गया है, जहां पुलिस पदाधिकारी और जवानों की तैनाती की गई है।
भविष्य में दोबारा न हो अतिक्रमण
स्थानीय थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो। सड़क अवसंरचना के संबंध में अदालत को बताया गया कि सड़क के सुदृढ़ीकरण एवं निर्माण के लिए 277.12 लाख रुपये की निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि फिलहाल अस्थायी मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है।
इस पर अदालत ने पटना नगर निगम को निर्देश दिया कि संबंधित सड़क को शीघ्र सड़क निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
खंडपीठ ने नगर निगम, जिला प्रशासन और राज्य सरकार को वन विभाग के पार्क प्रमंडल के साथ समन्वय स्थापित कर न्यायिक अकादमी के उत्तरी हिस्से और मुख्य प्रवेश क्षेत्र में हरित पट्टी, सौंदर्यीकरण तथा सुरक्षा घेराबंदी विकसित करने का भी निर्देश दिया।
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने और अदालत के निर्देशों के प्रभावी अनुपालन के लिए शहरी विकास एवं आवास विभाग को मामले में पक्षकार बनाया गया है। विभाग को अगली सुनवाई से पूर्व विस्तृत अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।