बिहार में दिल्ली जैसा हादसा, खुले नाले में गिरने से 2 साल की बच्ची की मौत
फुलवारी शरीफ के राय चौक में एक दुखद घटना में, दो साल की खतीजा खुले नाले में गिरकर मर गई। इस हादसे ने एक गरीब मजदूर परिवार की खुशियों को उजाड़ दिया है। ...और पढ़ें
HighLights
दो साल की खतीजा खुले नाले में गिरी, मौत।
हादसे से गरीब मजदूर परिवार पूरी तरह टूट गया।
खुले नालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे।
संवाद सूत्र, फुलवारी शरीफ। फुलवारी शरीफ के राय चौक में हुए हादसे ने एक गरीब मजदूर परिवार की जिंदगी से खुशियों की आखिरी किरण भी छीन ली। दो साल की मासूम खतीजा अब इस दुनिया में नहीं रही, लेकिन उसकी याद में डूबा परिवार हर पल टूट रहा है। जिस घर में बच्चों की किलकारी गूंजती थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही हैं।
मजदूरी कर परिवार और बच्चों का पेट पालने वाला पिता सुबह घर से निकला था, यह सोचकर कि शाम को लौटकर अपने बच्चों को गोद में उठाएगा। उसे क्या पता था कि शाम तक उसकी जिंदगी ही उजड़ जाएगी। जब उसे बताया गया कि उसकी दो साल की बेटी नाले में गिर गई है, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।
बताया जाता है कि खतीजा घर के दरवाजे पर खेल रही थी। खेलते-खेलते वह खुले नाले में गिर गई और कुछ ही पलों में सब खत्म हो गया। जब बच्ची का शव नाले से निकाला गया, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
रो-रोकर मां का बुरा हाल
मासूम का शव देखते ही मां चीख पड़ी, मेरी बेटी को बचा लो, वह बार पति से लिपट यही कह रही थी। मेरी बच्ची को उठाओ लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। मां बार-बार बेटी को सीने से लगाकर रोती रही। लोगों को उसे पकड़कर अलग करना पड़ा। वह बार-बार यही कह रही थी, अभी तो बोलना सीख रही थी, मुझे अम्मी कहती थी।
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चार साल का भाई अभी भी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी छोटी बहन अब कभी घर नहीं लौटेगी। वह घर के कोने-कोने में बहन को ढूंढ रहा है। कभी दरवाजे पर खड़ा हो जाता है, तो कभी मां से पूछता है बहन को क्या हो गया? यह सवाल सुनकर घर में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर जा रही हैं।
'अपनी बेटी को नहीं बचा सका'
पिता का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। वह बस इतना ही कह पा रहा है। मैं मजदूरी कर रहा था, ताकि बच्चों को अच्छा जीवन दे सकूं, लेकिन अपनी बेटी को बचा नहीं सका। यह कहते-कहते वह फूट-फूटकर रो पड़ता है।
पड़ोसियों का कहना है कि यह परिवार बहुत मेहनती और शांत स्वभाव का है। रोज मेहनत कर बच्चों का पेट पालने वाला यह परिवार अब मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। जिस घर में पहले बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां अब सन्नाटा और मातम है।
खतीजा की मौत ने सिर्फ एक परिवार से उनकी बेटी नहीं छीनी, बल्कि उनके सपने, उनकी हंसी और उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी छीन ली।
खुला नाला बना मौत की वजह
अब इस परिवार की आंखों में सिर्फ एक सवाल है। अगर नाला बंद होता, तो क्या हमारी खतीजा आज जिंदा होती? यह सवाल सिर्फ इस परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के सामने खड़ा है। क्योंकि एक मासूम की जिंदगी की कीमत शायद कभी नहीं चुकाई जा सकती।
शहर में कई स्थानों पर नाला का खुला होना मौत का कारण बन रहा है और अगर समय रहते चेता नहीं गया तब और कई जान जा सकती है।