बिहार: मृत्यु के बाद पिता ने बेटे और मां ने बेटी की आंखें की दान, रोशन होंगी 4 जिंदगियां
मृत्यु के बाद अपने पुत्र और पुत्री को खो चुके माता-पिता ने पीएमसीएच में उनकी आंखें दान कर मानवता की मिसाल पेश की, जिससे चार लोगों की जिंदगी रोशन हो सक ...और पढ़ें

आई बैंक में नेत्रदान करने वालों के स्वजन के सम्मान में आयोजित समारोह की शुरुआत करते अधीक्षक, प्रभारी प्राचार्या व अन्य।
HighLights
पुत्र-पुत्री खोने के बाद माता-पिता ने नेत्रदान किया।
पीएमसीएच में सम्मानित हुए नेत्रदान करने वाले परिवार।
नेत्रदान कम होने से 500 से अधिक मरीज प्रतीक्षारत।
जागरण संवाददाता, पटना। पुत्र या पुत्री को खो चुके माता-पिता के दर्द की कल्पना तक नहीं की जा सकती है। ऐसे असहनीय दर्द की घड़ी में भी उन्होंने अंधेरे को किसी और की नियति नहीं बनने दिया। पीएमसीएच में इलाज के दौरान बेटे की मृत्यु के बाद पिता ने तो बेटी को खो चुकी मां ने उनकी आंखें दान कर इस दुख की घड़ी में मानवता की मिसाल पेश की।
दोनों के इस फैसले से अब कम से कम चार लोगों की अंधेरी दुनिया रोशन हो सकेगी। मंगलवार को पीएमसीएच के नेत्र विभाग स्थित आई बैंक में ऐसे सभी स्वजन को सम्मानित कर समाज से नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील की गई।
भोजपुर निवासी 17 वर्षीय ईशू कुमार की मृत्यु के बाद उनके पिता सुरेश कुमार ने बेटे का नेत्रदान कराया। वहीं, नालंदा की 20 वर्षीय निशा कुमारी की मां चंदा देवी ने बेटी की आंखें दान कर इंसानियत का परिचय दिया। मं
गलवार को ही 75 वर्षीय लाल साह के निधन के बाद उनके पुत्र विनोद कुमार ने भी नेत्रदान की सहमति दी तो अरवल निवासी 25 वर्षीय राहुल कुमार के निधन के बाद उनके पिता टून्नू कुमार ने बेटे का नेत्रदान कराया।
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सम्मान समारोह में अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि नेत्रदान श्रेष्ठदान है। मृत्यु के बाद भी किसी व्यक्ति की आंखें दो लोगों की जिंदगी रोशन कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि 2018 से पीएमसीएच में आई बैंक संचालित है, लेकिन जागरूकता के अभाव में अपेक्षित संख्या में नेत्रदान नहीं हुआ।
दधीचि देहदान समिति के महासचिव विमल जैन ने भी लोगों से अंगदान और नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन आद बैंक प्रभारी डॉ. प्रियंका ने किया।
मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ. नागेश्वर शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि डॉ. रेणुका ने आई बैंक की गतिविधियों की जानकारी दी। प्रभारी प्राचार्य प्रो. डॉ. मधु सिन्हा, नेत्र विभाग के डॉ. संजीव कुमार, डॉ. सुनील कुमार, दधीचि देहदान समिति के सचिव सुनील कुमार पूर्वे, डॉ. अनुपमा सिंह समेत कई चिकित्सक मौके पर उपस्थित रहे।
नेत्रदान कम, इंतजार लंबा:
- 2018 से पीएमसीएच में संचालित है आई बैंक।
- 500 से अधिक मरीज पंजीकृत है कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए।
- 300 कॉर्निया प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं अब तक।
- 30-35 नेत्रदान ही हो रहे प्रतिवर्ष, इससे बढ़ रही प्रतीक्षा सूची।
- 6 घंटे मृत्यु के बाद सुरक्षित निकाला जा सकता कॉर्निया, इससे दो लोगों को मिल सकती रोशनी।
- कॉर्निया निकालने से आंखें नहीं होती वीभत्स, पहचानना भी मुश्किल की निकाला गया कॉर्निया।