यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Cyber Crime: बैंकों के कस्टमर केयर के नाम पर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश, ऐसे लगाते थे लोगों को लाखों का चूना
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कस्टमर केयर से मिलते-जुलते नंबर लेकर साइबर ठगी कर रहे दो अपराधियों को पटना से गिरफ्तार किया गया है। ईओयू ने तकनीकी जांच ...और पढ़ें

HighLights
- 1930 पर ऑनलाइन ठगी की लगातार मिल रही थी शिकायत
- दो साइबर अपराधियों को पटना से किया गया गिरफ्तार
राज्य ब्यूरो, पटना। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कस्टमर केयर से मिलते-जुलते नंबर लेकर देश भर में साइबर ठगी कर रहे दो अपराधियों को पटना से गिरफ्तार किया गया है। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की विशेष टीम ने तकनीकी जांच एवं टावर लोकेशन के आधार पर गिरोह के दो सदस्यों विकास रंजन और सूरज कुमार को पकड़ा है।
विकास पटना के पश्चिमी लोहानीपुर जबकि सूरज कुमार बिहारशरीफ के लहेरी का रहने वाला है। इनके पास से 17 मोबाइल फोन, 15 डेबिट कार्ड, 15 आधार कार्ड, लैपटाप के साथ दस से जयादा बैंकों के पासबुक और एक स्विफ्ट डिजायर कार भी बरामद की गई है।
ईओयू के अनुसार, साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल 1930 पर ऑनलाइन ठगी की लगातार शिकायत मिल रही थी। सत्यापन के बाद जांच की गई तो पता चला कि एक संगठित गिरोह के द्वारा कैपिटल फर्स्ट, उत्कर्ष स्माल फाइनेंस बैंक, बंधन बैंक, आईडीएफसी बैंक और फि्लपकार्ट आदि के कस्टमर केयर से मिलते-जुलते नंबरों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की जा रही है।
पूरे देश से साइबर पोर्टल पर ऐसी करीब 190 शिकायतें अब तक दर्ज हो चुकी है। इससे जुड़ा एक कांड पहले से पटना के साइबर थाने में भी दर्ज है।
परेशान ग्राहक खुद बन जाते थे शिकार
ईओयू के अनुसार, संगठित गिरोह के अपराधी उक्त कंपनियों और बैंकों के कस्टमर केयर नंबर से मिलते-जुलते नंबरों का सिम सक्रिय करा लेते थे। इसके बाद इन नंबरों को गूगल सर्च इंजन में डाल दिया जाता था जिसे आमलोग असली कस्टमर केयर नंबर समझ लेते थे।
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संबंधित बैंक या कंपनी से जुड़ी किसी तरह की परेशानी पर ग्राहक जब गूगल पर कस्टमर केयर का नंबर ढूंढते तो ठगों के नंबर दिखते। आमजन साइबर ठगों से असली कस्टमर केयर नंबर समझकर काल कर सहयोग मांगते और फिर ठगी के शिकार हो जाते।
मनी लॉन्ड्रिंग के तहत होगी कार्रवाई
ईओयू के अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार विकास और सूरज की निशानदेही पर अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। अपराधियों के पास से मिले मोबाइल और बैंक खातों की जांच भी हो रही है।
बैंक खातों को जब्त कर जमा राशि का पता लगाया जा रहा है। अपराधियों की अर्जित संपत्ति की मनी लांड्रिंग कानून के तहत भी जांच की जाएगी। इसके लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई होगी।
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