Oral Cancer: मुंह की सफाई में लापरवाही पड़ सकती है भारी, बढ़ रहा ओरल कैंसर का खतरा
पटना के अस्पतालों में 80% युवा दांतों की समस्याओं से पीड़ित हैं, जिनमें बच्चों में कैविटीज आम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब मौखिक स्वच्छता और तंबाकू ...और पढ़ें

मुंह की सफाई में लापरवाही पड़ सकती है भारी, बढ़ रहा ओरल कैंसर का खतरा (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी के प्रमुख अस्पतालों आईजीआईएमएस, पटना डेंटल कॉलेज, एनएमसीएच, पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) और एम्स पटना की डेंटल ओपीडी में आने वाले करीब 80 प्रतिशत युवा दांतों से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित पाए जा रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या सबसे अधिक है और रोजाना 25 से ज्यादा बच्चे कैविटीज (दांतों की सड़न) का इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, पटना जिले में लगभग 40 प्रतिशत लोग मसूड़ों की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि 20 प्रतिशत मरीज सब-म्यूकस फाइब्रोसिस से प्रभावित हैं, जो आगे चलकर ओरल कैंसर में बदल सकता है।
डॉ. एके शर्मा ने बताया कि पान, गुटखा, जर्दा और मीट-मटन का अधिक सेवन युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है, इससे मसूड़ों से खून आना, सूजन, मुंह में दर्द, कैविटी और बदबू जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ तंबाकू ही नहीं, बल्कि मुंह की साफ-सफाई में कमी भी ओरल कैंसर का बड़ा कारण बन सकती है।
खराब ओरल हेल्थ का असर केवल दांतों तक सीमित नहीं
- हड्डियों पर असर: मसूड़ों की सूजन और कमजोरी से हड्डियां भी कमजोर हो सकती हैं।
- दिल की बीमारी: मसूड़ों के रोग से हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है।
- अल्जाइमर: बैक्टीरिया मस्तिष्क तक पहुंचकर स्मृति संबंधी रोगों का खतरा बढ़ा सकते हैं।
- कैंसर: मसूड़ों की बीमारी से कुछ कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।
ऐसे रखें ओरल हेल्थ का ध्यान
- दिन में दो बार कम से कम 2 मिनट तक ब्रश करें
- मीठा खाने के बाद कुल्ला जरूर करें
- हर छह महीने में दंत चिकित्सक से जांच कराएं
- मसूड़ों को ध्यान में रखते हुए हल्के हाथ से गोलाकार ब्रश करें
- जरूरत हो तो माउथवाश का उपयोग करें
- महिलाएं व्यस्तता के कारण दांतों की समस्या को नजरअंदाज न करें