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घर में पानी, खेत में पानी और चूल्हा भी बंद...; पटना में गौरीचक के बाढ़ पीड़ितों की बढ़ी मुश्किलें

Published: Sun, 06 Sep 2026 11:15 AM (IST)

पुनपुन और दरधा नदियों के रौद्र रूप से गौरीचक क्षेत्र में भीषण बाढ़ आ गई है, जिससे पुनपुन ने दस ...और पढ़ें

सामुदायिक रसोई में पुलिस की निगरानी में दिया जा रहा भोजन। जागरण

सामुदायिक रसोई में पुलिस की निगरानी में दिया जा रहा भोजन। जागरण

HighLights

  1. पुनपुन नदी ने दस वर्षों का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।

  2. गौरीचक क्षेत्र में दर्जनों गांव बाढ़ से जलमग्न हुए।

  3. चिहुट में रिंग बांध से रिसाव, राहत की मांग।

नकी इमाम, फुलवारी शरीफ। पुनपुन और दरधा नदियों के रौद्र रूप ने गौरीचक क्षेत्र में तबाही मचा दी है। पुनपुन नदी ने जहां पिछले 10 वर्षों का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, वहीं दरधा नदी भी उफान पर है।

दोनों नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर से गौरीचक का बड़ा इलाका पानी के समंदर में तब्दील हो गया है। दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी फैलने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

धनकी, चिहुट, सलारपुर, बकपुर समेत आसपास के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। गांवों की गलियां, खेत-खलिहान और संपर्क सड़कें पानी में डूब गई हैं। सड़क संपर्क टूटने के कारण कई गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। ग्रामीणों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक आना-जाना मुश्किल हो गया है।

घर में रखा राशन भी पानी में बर्बाद

बाढ़ ने लोगों के सामने सिर्फ रहने की समस्या नहीं खड़ी की है, बल्कि भोजन का संकट भी गहरा गया है। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक अनाज, राशन, कपड़े, बिस्तर, जलावन और रोजमर्रा की जरूरत का सामान रखा था, वहां अब पानी भरा है।

घर में सामान मौजूद होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों के अनुसार अनाज पानी में भीगकर खराब हो गया है। कपड़े और बिस्तर भी पूरी तरह गीले होकर बर्बाद हो गए।

खाना बनाने के लिए रखा जलावन पानी में डूब गया है। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है। ऐसे में दो वक्त की रोटी के लिए लोगों को दूसरों की मदद पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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(सबकुछ डूब जाने से घर छोड़ने की मजबूरी।)

सामुदायिक भोजन के सहारे परिवार

बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थानीय मुखिया के स्तर पर कुछ स्थानों पर सामुदायिक भोजन की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां पहुंचकर भोजन कर रहे हैं।

लोगों की संख्या अधिक होने के कारण व्यवस्था संभालना भी चुनौती बन गया है। इसके बावजूद लोग घंटों इंतजार कर भोजन मिलने की उम्मीद में खड़े रहते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए भोजन जुटाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। बाढ़ के बीच घरों में खाना पकाना संभव नहीं है। ऐसे में सामुदायिक भोजन ही कई परिवारों का सहारा बना हुआ है।

खेत-खलिहान डूबे, पशुचारे का संकट

बाढ़ का पानी खेत-खलिहानों में फैलने से धान समेत अन्य फसलें भी डूब गई हैं। किसानों को घर में रखे सामान की बर्बादी के साथ फसल नुकसान की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। खेतों में कई दिनों से पानी जमा रहने के कारण फसल के खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

पशुपालकों के सामने भी गंभीर संकट है। मवेशियों के लिए रखा चारा पानी में डूबकर खराब हो गया है। अब पशुओं को खिलाने के लिए चारा जुटाना मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पशुचारा उपलब्ध कराने की मांग की है।

बोरे रखकर रिंग बांध को बचाने की कोशिश

रिंग बांध में रिसाव की समस्या ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है। रिसाव रोकने के लिए बोरे रखकर पानी के दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण स्थिति पूरी तरह काबू में नहीं आ रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि बांध में कई दिनों से रिसाव हो रहा था। यदि समय रहते इसकी स्थायी मरम्मत करा दी जाती तो आज स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। अब लगातार पानी के दबाव के बीच ग्रामीण खुद भी बांध को बचाने की कोशिश में जुटे हैं।

ग्रामीणों ने कहा- जायजा नहीं, राहत की जरूरत

बाढ़ की गंभीर स्थिति के बीच स्थानीय प्रशासन की टीम प्रभावित इलाकों में पहुंची और हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बाढ़ और उनकी समस्याओं की जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीणों ने भोजन, पीने का पानी, दवा, पशुचारा, तिरपाल और अन्य राहत सामग्री तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल स्थिति का जायजा लेने से समस्या का समाधान नहीं होगा। बाढ़ में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए बचाव अभियान तेज करने की आवश्यकता है। लगातार बढ़ते पानी के बीच लोगों को अब प्रशासन से तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है।

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