1990 में शुरू हुई 'सम्राट' की राजनीतिक पारी, दो बार बन चुके हैं नीतीश कुमार के डिप्टी सीएम
मुंगेर के तारापुर से विधायक और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं। राजद से राजनीति शुरू कर दो बार उपमुख्यमंत्री ...और पढ़ें
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बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, पटना। मुंगेर जिले की तारापुर विधानसभा सीट से विधायक और बीजेपी के दिग्गज नेता सम्राट चौधरी अब बिहार के नए सम्राट बनने के लिए तैयार हैं। बिहार बीजेपी विधान मंडल की बैठक में सम्राट चौधरी (Bihar New CM Samrat Choudhary) के नाम पर मुहर लग गई है।
चलिए आइए जानते हैं राजद से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले सम्राट आखिर बिहार बीजेपी के सबसे दिग्गज नेता कैसे बन गए-
सम्राट चौधरी: बिहार की राजनीति का एक उभरता चेहरा
सम्राट चौधरी बिहार के प्रमुख राजनेताओं में से एक बनकर उभरे हैं। उन्हें उनकी कुशल राजनीतिक रणनीतियों और आयोजन क्षमता के लिए जाना जाता है, जो उनके शक्तिशाली पारिवारिक वंश और उनके व्यापक राजनीतिक करियर को दर्शाता है।
एक मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा, सार्वजनिक छवि और महत्वपूर्ण चुनावों से ठीक पहले राजनीतिक पटल पर उनके उदय ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व बना दिया है।
सम्राट चौधरी की शिक्षा
सम्राट चौधरी का शैक्षिक इतिहास उनके राजनीतिक करियर और उनकी रिपोर्ट की गई योग्यताओं से संबंधित विवादों के कारण सार्वजनिक जांच का विषय रहा है।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा बिहार में पूरी की और बाद में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने उल्लेख किया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय से प्री-फाउंडेशन कोर्स (PFC) पूरा किया है, जिसे पारंपरिक डिग्री के समकक्ष होने को लेकर बहस होती रही है।
उन्होंने डॉक्टर ऑफ लेटर्स (D.Litt.) की मानद उपाधि का भी उल्लेख किया है, जो औपचारिक पढ़ाई से प्राप्त शैक्षणिक डिग्री नहीं बल्कि एक प्रकार का सम्मान है।
इन योग्यताओं को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा होती रही है, लेकिन चौधरी का मानना है कि उनकी पहचान उनके प्रशासनिक अनुभव और शासन में बिताए गए वर्षों से है, न कि केवल प्राप्त शैक्षिक प्रमाणपत्रों से।
सम्राट चौधरी का विधानसभा क्षेत्र
सम्राट चौधरी ने बिहार के मुंगेर जिले में गहरी पैठ बनाई है, जहां तारापुर विधानसभा क्षेत्र स्थित है। तारापुर की एक लंबी राजनीतिक परंपरा रही है, जो राजनीतिक रूप से सक्रिय मतदाताओं वाले राज्य में अपनी एक अलग पहचान रखती है।
तारापुर का प्रतिनिधित्व लंबे समय तक उनके परिवार द्वारा किया गया है। क्षेत्र में उनके गहरे पारिवारिक इतिहास ने उन्हें जमीनी स्तर पर समर्थन हासिल करने में मदद की है। इसके अतिरिक्त, जमुई लोकसभा सीट के अंतर्गत आने के कारण, तारापुर बिहार के चुनावी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है।
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सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर
प्रारंभिक राजनीतिक चरण
- 1990 के दशक की शुरुआत में पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण सक्रिय राजनीति में शामिल हुए।
- बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में एक युवा नेता के रूप में खुद को तेजी से स्थापित किया।
पहला प्रमुख पद
- विधायक के रूप में चुने गए और राज्य विधानसभा में जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कीं।
- बिहार सरकार में कृषि मंत्री नियुक्त किए गए, जो चौधरी का पहला मंत्री पद का अनुभव था।
महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार
चौधरी को नगर विकास, आवास और अंततः पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए, जो शासन और नीति निर्धारण में उनकी बढ़ती भूमिका का संकेत थे। उन्हें एक कट्टर प्रशासक और मुखर नेता के रूप में देखा गया।
भाजपा में उत्थान
- पार्टी के भीतर एक प्रमुख केंद्रीय संगठनात्मक व्यक्ति के रूप में उभरे।
- जल्द ही उन्हें बिहार भाजपा अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिससे उनकी राजनीतिक उपस्थिति और मजबूत हुई।
बिहार के उपमुख्यमंत्री
वर्ष 2024 में चौधरी का कद और बढ़ गया जब उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसने उन्हें बिहार राज्य में पार्टी के शीर्ष नेताओं में से एक के रूप में स्थापित कर दिया।
इसके बाद साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भी एनडीए की सरकार बनी और वह फिर डिप्टी सीएम बने। वहीं, अब नीतीश कुमार के बाद वही राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे।