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    'फरक्का समझौते' पर राज्यसभा में गरजे JDU के संजय झा, बोले- बिहार के हक की हुई अनदेखी

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 08:17 PM (IST)

    राज्यसभा में संजय झा ने केंद्र से बांग्लादेश के साथ फरक्का जल समझौते का नवीकरण न करने का आग्रह किया, क्योंकि यह बिहार की जल सुरक्षा को प्रभावित करता ह ...और पढ़ें

    फरक्का जल समझौते का नवीकरण न हो, बिहार के हितों की अनदेखी बंद हो: संजय झा

    फरक्का जल समझौते का नवीकरण न हो, बिहार के हितों की अनदेखी बंद हो: संजय झा

    HighLights

    1. संजय झा ने फरक्का जल समझौते के नवीकरण का विरोध किया।

    2. बिहार की जल सुरक्षा पर समझौते के प्रतिकूल प्रभाव बताए।

    3. 2050 तक गंगा बेसिन राज्यों की जल आवश्यकताओं का आकलन हो।

    राज्य ब्यूरो, पटना। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा ने गुरुवार को राज्यसभा में बिहार के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुए ऐतिहासिक "फरक्का जल समझौते" की समय-सीमा इस साल 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने जा रही है।

    केंद्र सरकार से उन्होंने मांग किया कि इस समझौते का नवीकरण नहीं किया जाए। इसके स्थान पर बिहार सहित गंगा बेसिन पर निर्भर सभी राज्यों की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं का वैज्ञानिक तरीके से सटीक आकलन कर, एक नई व्यवस्था बनाई जाए।

    संजय ने कहा कि उनकी पार्टी जदयू तथा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से ही फरक्का जल समझौते का विरोध करते रहे हैं। जदयू का मानना है कि इस समझौते में बिहार के व्यापक हितों की अनदेखी की गई है।

    संजय ने कहा कि जब वे राज्य सरकार के जल संसाधन मंत्री थे, उस दौरान भी उन्होंने विभिन्न मंचों से यह मांग की थी कि केंद्र सरकार फरक्का जल समझौते पर पुनर्विचार करे। फरक्का बराज का निर्माण मूल रूप से कोलकाता पोर्ट और हुगली नदी में पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखने के लिए किया गया था, लेकिन बाद में यूपीए सरकार द्वारा 12 दिसंबर 1996 को बांग्लादेश के साथ किए गए फरक्का जल समझौते का बिहार की जल सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    पिछले तीन दशकों के अनुभव बताते हैं कि शुष्क मौसम के दौरान बिहार को पानी की भारी किल्लत झेलनी पड़ती है। बिहार में गंगा बेसिन पर निर्भर कृषि, पेयजल, औद्योगिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा के लिए पर्याप्त गंगा जल की उपलब्धता अनिवार्य है।

    वर्ना में जल संकट के कारण विशेषकर दक्षिण बिहार के जिलों में भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे सेचाई के साथ-साथ पीने के पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है।

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    संजय ने बिहार सरकार के आकलनों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2050 तक की भावी जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य को लगभग 2,000 क्यूसेक अतिरिक्त जल की आवश्यकता होगी, जबकि फरक्का जल समझौते के वर्तमान स्वरूप में इसके मुकाबले काफी कम जल का प्रावधान किया है।

    उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि बिहार सहित गंगा बेसिन पर निर्भर सभी राज्यों की वास्तविक जल आवश्यकताओं का एक नया और वैज्ञानिक आकलन कराया जाए तथा उसके आधार पर नई व्यवस्था बनाई जाए।