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    तेजप्रताप के लिए मुखर होकर रिश्तों संग राजनीति साध रहे तेजस्वी, 5 लक्ष्यों पर फोकस

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 11:04 PM (IST)

    Tejpratap Yadav की गिरफ्तारी के बाद तेजस्वी यादव ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है। तेजस्वी इस कदम से पारिवारिक संबंधों के साथ-साथ अपनी राजनीतिक महत्वाक ...और पढ़ें

    पुलिस की कार्रवाई में घायल प्रदर्शनकारियों को देखने अस्पताल पहुंचे तेजस्वी। फोटो एएनआई

    पुलिस की कार्रवाई में घायल प्रदर्शनकारियों को देखने अस्पताल पहुंचे तेजस्वी। फोटो एएनआई

    HighLights

    1. तेजप्रताप की गिरफ्तारी पर तेजस्वी ने दिया जोरदार समर्थन।

    2. तेजस्वी इस कदम से साध रहे पांच प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य।

    3. लालू परिवार की जेल पीड़ा का अनुभव, तेजस्वी मुखर हुए।

    विकाश चन्द्र पाण्डेय, पटना। राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा में परिवार और स्वजन भले ही दरकिनार कर दिए जाएं, लेकिन दु:ख की घड़ियां साझा-ही होती हैं। यहां तो आगे निकल जाने की होड़ भी है, फिर संकोच क्यों होता।

    बड़े भाई तेजप्रताप यादव की गिरफ्तारी पर राजद के कार्यकारी अध्यक्ष Tejashwi Yadav का उबल पड़ना अनायास नहीं। यह ''खून'' की तड़प है और उस ऊंचाई से स्वयं के आगे दिखने की रणनीति भी, जहां इस गिरफ्तारी के बाद तेजप्रताप खड़े दिख रहे हैं।

    वाहवाही लुटने और बयानबाजी से इतर छात्रों के इस आंदोलन में राजद या तेजस्वी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रही। अलबत्ता तेजप्रताप धमाल मचाते रहे। शनिवार को गिरफ्तारी से पहले वे एक बार हिरासत मेंं भी लिए जा चुके थे, लेकिन जोश ठंडा नहीं पड़ा। अंतत: 14 दिनों के लिए बेउर जेल पहुंचा दिए गए।

    परिवार की पीड़ा

    जेल की पीड़ा का अनुभव लालू परिवार से अधिक शायद ही किसी राजनीतिक परिवार को हो। तेजप्रताप अभी विधायक नहीं और कुछ दिनों के मधुर संबंध के बाद इन दिनों सत्ता पक्ष के साथ तनातनी भी चल रही।

    स्पष्ट है कि जेल में खातिर-बात नहीं होनी। परिवार व्याकुल है और तेजस्वी मुखर। तेजप्रताप सहित दूसरे आंदोलनकारियों की अविलंब रिहाई नहीं होने पर उन्होंने ऐसे उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है, जो सम्राट चौधरी को सत्ताच्युत करने के बाद ही थमेगी।

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    संभव है कि यह बड़बोलापन हो, लेकिन तेजस्वी जानते हैं कि उनकी इस चेतावनी पर जनता बहुत हद तक विश्वास कर सकती है, क्योंंकि उनके साथ राजद और वाम दलों का जनाधार है।

    24 दिन बाद जाग्रत हुई राजनीतिक चेतना 

    यही चेतावनी अगर तेजप्रताप देते हैं, तो बातें हवा-हवाई हो जाएंगी। कारण यह कि राजद से अलग पार्टी (जनशक्ति जनता दल) बनाकर तेजप्रताप विधानसभा चुनाव में अपनी सीट तक नहीं बचा पाए। महुआ में वे तीसरे स्थान पर पहुंच गए।

    दाएं-बाएं घूमने वाले लोगों के अतिरिक्त कोई साथी-सहयोगी नहीं, जनाधार दूर की बात ठहरी। सलाहकार ऐसे हैं, जो राजनीति में तेजप्रताप की स्थिति प्राय: हास्यास्पद बना देते हैं।

    हालांकि, इस आंदोलन मेंं सहभागिता से वे दामन के कई दाग को धोने का उपक्रम कर गए, जबकि तेजस्वी यूरोप भ्रमण के बाद दिल्ली में आकर ठिठके रहे। 24 दिनों बाद रविवार को पटना लौटने पर राजनीतिक चेतना जाग्रत हुई है।

    पांच लक्ष्य

    1. विधान मंडल के मानसून सत्र से तेजस्वी अनुपस्थित रहे हैं। अब आक्रामक होकर चेहरा चमकाना चाह रहे, ताकि महागठबंधन पर दावा बना रहे।

    2. तेजप्रताप के राजनीतिक पैंतरे से राजद को अपेक्षाकृत अधिक नुकसान होता है, जबकि तेजस्वी का पूरा भविष्य राजद से जुड़ा हुआ है।

    3. आंदोलन युवाओं का रहा है, जो बिहार की जनसंख्या मेंं 40 प्रतिशत से अधिक के हिस्सेदार हो चुके हैं। तेजस्वी को इनसे बड़ी आशा है।

    4. तेजप्रताप के साथ खड़े होकर तेजस्वी उस अंतर को पाटने का उपक्रम भी कर रहे, जिससे होकर दूसरे लोग दोनों के मामलों में घुसपैठ कर रहे।

    5. तेजप्रताप अगर तनिक भी मद्धिम होते हैं, तो रोहिणी आचार्य आदि का सुर भी तेजस्वी के प्रति नरम होगा। वैसे में सार्वजनिक फजीहत नहीं होगी।

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