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    ‘40 हजार करोड़ की अवैध अर्थव्यवस्था’; शराबबंदी पर तेजस्वी यादव का बड़ा आरोप, नीतीश सरकार से मांगा जवाब

    Updated: Mon, 06 Apr 2026 02:44 PM (IST)

    तेजस्वी यादव ने बिहार में शराबबंदी के 10 साल पूरे होने पर इसे पूरी तरह विफल बताया है। उन्होंने सरकार पर 'संस्थागत भ्रष्टाचार' का आरोप लगाते हुए कहा कि ...और पढ़ें

    HighLights

    1. शराबबंदी को बताया पूरी तरह विफल, सरकार पर सवाल।

    2. 40 हजार करोड़ की अवैध अर्थव्यवस्था का आरोप लगाया।

    3. गरीबों को निशाना बनाने और भ्रष्टाचार का दावा किया।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में शराबबंदी कानून के 10 वर्ष पूरे होने पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्‍वी यादव ने इसे पूरी तरह विफल करार देते हुए राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए पोस्ट में उन्होंने पूछा कि शराबबंदी की विफलता का जिम्मेदार कौन है और सरकार से अपने सवालों का जवाब मांगा।

    नीतीश सरकार का सबसे बड़ा संस्‍थागत भ्रष्‍टाचार 

    तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि यह कानून शासन-प्रशासन और शराब माफिया के कथित गठजोड़ के कारण अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सका। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का 'सबसे बड़ा संस्थागत भ्रष्टाचार' करार दिया।

    उन्होंने दावा किया कि शराबबंदी के कारण राज्य में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है।

    उनके मुताबिक, कानून लागू होने के बाद अब तक 11 लाख से अधिक केस दर्ज किए गए हैं और 16 लाख से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 5 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है।

    तेजस्वी ने कहा कि सिर्फ पिछले पांच वर्षों में 2 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई, जो प्रतिदिन औसतन 11 हजार लीटर से ज्यादा है।

    जब्‍ती के साथ खपत का आंकड़ा सार्वजन‍िक करे सरकार

    उन्होंने यह भी दावा किया कि वास्तविक खपत इससे कहीं अधिक है और सरकार को जब्ती के साथ-साथ खपत के आंकड़े भी सार्वजनिक करने चाहिए।

    उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी के बावजूद राज्य में अवैध शराब और अन्य नशीले पदार्थों का कारोबार बढ़ा है। युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने की भी बात कही गई।

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य में शराब की आपूर्ति कैसे हो रही है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।

    कानून की आड़ में गरीबों-दलितों को बनाया जा रहा निशाना

    उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून की आड़ में गरीबों, दलितों और पिछड़े वर्गों को अधिक निशाना बनाया जा रहा है।

    इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी शराबबंदी के क्रियान्वयन को लेकर टिप्पणी की है। तेजस्वी यादव के अनुसार, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों के बावजूद तस्करों और बड़े नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।

    अंत में उन्होंने सरकार से मांग की कि शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।