यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 30, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Bihar: लोकसभा चुनाव में दूध से जली भाजपा, अब मट्ठा भी फूंक कर पियेगी; कुशवाहा बोले- गंदी राजनीति हुई...
लोकसभा चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए भाजपा 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए सतर्कता बरत रही है। सहयोगी दलों से सलाह ली जा रही है कि लोकसभा चुन ...और पढ़ें

HighLights
- लोकसभा चुनाव की हार का विश्लेषण
- भितरघात से हारी सीटें चिह्नित
- कमजोर विधायकों को टिकट नहीं
राज्य ब्यूरो, पटना। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को दूध से जलने का एहसास हुआ था। उससे सबक लेकर वह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी के समय मट्ठा भी फूंक कर पीने का प्रयास कर रही है। उसे सहयोगी दलों से भी सलाह मिल रही है कि लोकसभा चुनाव की पुनरावृति न होने पाए।
2019 में भाजपा 17 लोकसभा सीटों पर जीती थी। 2024 में वह इनमें से पांच सीटें हार गई। आरा, बक्सर, औरंगाबाद, सासाराम और पटना की सीटों पर हुई हार का कारण खराब रणनीति और अपनों का भितरघात बताया गया। खराब चुनावी रणनीति के कारण पाटलिपुत्र, औरंगाबाद और आरा में उसकी हार हुई।
अपने ही बन गए हार का कारण
बक्सर और सासाराम की हार के लिए विशुद्ध रूप से भितरघात को जवाबदेह ठहराया जा रहा है। लोकसभा चुनाव का बारीक विश्लेषण उसे बता रहा है कि कई सीटों पर अपने ही हार का कारण बन गए थे। ऐसे लोगों की पहचान हो रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष तीन दिनों से यहां इसी मंथन में जुटे हैं कि विधानसभा चुनाव को किस तरह लोकसभा चुनाव की कमजोरियों से दूर रखा जाए। वे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों से विमर्श कर रहे हैं।
खबरें और भी
अगर बेटिकट हुए विधायक बागी बन गए तो?
संभव है कि राज्य सरकार में शामिल मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन भी हो। यह तय माना जा रहा है कि न सिर्फ एनडीए, बल्कि महागठबंधन के दल भी अपने कमजोर विधायकों को मोर्चे पर नहीं भेजेंगे। आकलन यह भी हो रहा है कि बेटिकट हुए विधायक अगर बागी बन कर मैदान में उतर गए तो क्या होगा। भाजपा पर सहयोगी दलों का भी दबाव है।
कुशवाहा बोले- अगर गंदी राजनीति हुई तो...
इस संदर्भ में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा की टिप्पणी महत्वपूर्ण है। मोर्चा के तीन दिवसीय चिंतन शिविर में कुशवाहा ने कहा- विधानसभा चुनाव में अगर लोकसभा चुनाव की तरह दांव-पेच की संकीर्ण गंदी राजनीति हुई तो उसका लाभ विपक्ष को मिलेगा।
उस समय कुशवाहा के लोकसभा क्षेत्र काराकाट में भाजपा से जुड़े अभिनेता पवन सिंह निर्दलीय उम्मीदवार बन गए थे। राजपूतों के बड़े हिस्से ने पवन सिंह के पक्ष में मतदान किया।
प्रतिक्रिया में कुशवाहा बिरादरी के वोटरों ने औरंगाबाद, सासाराम, बक्सर और आरा में भाजपा के पक्ष में मन से मतदान नहीं किया। औरंगाबाद का मतदान काराकाट से पहले हुआ था, लेकिन उस क्षेत्र में यह बात फैल गई थी कि काराकाट के राजपूत वोटर पवन सिंह के पक्ष में गोलबंद हो रहे हैं।