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    कौन हैं शिवचंद्र राम? RJD का MLC टिकट नहीं मिलने पर खूब रोए, कहा- 4 रात से सोया नहीं; ऐसी जिंदगी किसी को न मिले

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 06:13 PM (IST)

    राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने विधान परिषद (MLC) चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी के सभी पदों से इस ...और पढ़ें

    वरिष्ठ नेता शिवचंद्र राम

    वरिष्ठ नेता शिवचंद्र राम

    HighLights

    1. टिकट न मिलने से नाराज होकर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया

    डिजिटल डेस्क, पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता शिवचंद्र राम का जन्म 5 फरवरी 1971 को बिहार के वैशाली जिले के महुआ में प्रभु राम के घर हुआ था।

    वे दलित समुदाय (रविदास समाज) से आते हैं और सामाजिक रूप से सक्रिय राजनीतिक पहचान रखते हैं।

    शिक्षा और शुरुआती पेशा

    शिवचंद्र राम ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने पशुपालन को पेशे के रूप में अपनाया था।

    यही उनका शुरुआती जीवन और आजीविका का आधार रहा।

    सियासी सफर की शुरुआत

    उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। वे 2005 में महुआ सीट से पहली बार विधायक बने और बाद में 2015 में राजा पाकर सीट से फिर विधायक चुने गए।

    मंत्री पद और राजनीतिक कद

    2015 में उन्हें बिहार सरकार में कला, संस्कृति एवं युवा मामलों का मंत्री बनाया गया।

    वे लंबे समय तक RJD के दलित चेहरे और लालू प्रसाद यादव व तेजस्वी यादव के करीबी सहयोगी माने जाते रहे हैं।

    संगठनात्मक जिम्मेदारियां और पहचान

    शिवचंद्र राम युवा RJD के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में रविदास चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

    पार्टी संगठन में उन्हें दलित नेतृत्व के मजबूत चेहरों में गिना जाता है।

    प्रॉपर्टी और सार्वजनिक छवि

    उनकी सार्वजनिक संपत्ति को लेकर विस्तृत आधिकारिक विवादित जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन वे मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से उभरकर राजनीति में पहुंचे नेताओं में शामिल माने जाते हैं।

    चुनावी हार और राजनीतिक संघर्ष

    उन्होंने 2019 में हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, 2020 में पातेपुर विधानसभा सीट से और 2024 में फिर हाजीपुर से चुनाव लड़ा, लेकिन तीनों बार हार का सामना करना पड़ा।

    MLC टिकट विवाद और भावुक इस्तीफा

    विधान परिषद चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर उन्होंने RJD के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।

    पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वे भावुक हो गए और रोते हुए बोले कि पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम करने के बावजूद उनके साथ अन्याय हुआ।

    RJD में बढ़ी सियासी हलचल

    उनके इस्तीफे के बाद RJD में अंदरूनी असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।

    यह मामला पार्टी संगठन और आने वाले चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है।

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