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    पूर्णिया में 'राम भरोसे' राजस्व व्यवस्था: 22 हल्कों में सिर्फ 14 कर्मचारी, कैसे सुलझेंगे जमीनी विवाद?

    Updated: Wed, 15 Jul 2026 02:17 PM (IST)

    धमदाहा अंचल में कर्मचारियों और अमीनों की भारी कमी के कारण भूमि विवादों का निपटारा बाधित हो रहा है, जिससे आम लोगों को राजस्व सेवाओं में देरी का सामना क ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. धमदाहा अंचल में राजस्व कर्मचारियों और अमीनों की भारी कमी।

    2. भूमि विवादों के निपटारे और राजस्व सेवाओं में अनावश्यक देरी।

    3. स्थानीय लोगों ने पर्याप्त नियुक्तियों की मांग की, विवादों पर अंकुश।

    संवाद सहयोगी, धमदाहा (पूर्णिया)। जमीन संबंधी विवादों के कारण वर्षों से सुर्खियों में रहने वाला धमदाहा अंचल इन दिनों गंभीर कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। भूमि विवादों के त्वरित निष्पादन और राजस्व प्रशासन की प्रभावी व्यवस्था के लिए पर्याप्त मानव संसाधन आवश्यक है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

    इसका सीधा असर आम लोगों को मिलने वाली राजस्व सेवाओं और भूमि विवादों के निपटारे पर पड़ रहा है। धमदाहा अंचल में कुल 22 हल्के हैं, जबकि इनके संचालन के लिए मात्र 14 राजस्व कर्मचारी ही कार्यरत हैं।

    ऐसे में कई कर्मचारियों को एक से अधिक हल्कों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है। नतीजतन दाखिल-खारिज, सीमांकन, लगान रसीद, परिमार्जन, ऑनलाइन म्यूटेशन और भूमि विवाद से जुड़े मामलों के निष्पादन में अनावश्यक देरी हो रही है। स्थिति अमीनों की भी चिंताजनक है।

    अंचल में कम से कम 10 अमीनों की आवश्यकता बताई जाती है, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 5 अमीन ही कार्यरत हैं। सीमांकन और भूमि मापी से जुड़े अधिकांश मामलों में अमीनों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। कर्मचारियों की कमी के कारण सीमांकन कार्य समय पर नहीं हो पाता, जिससे छोटे-छोटे विवाद भी लंबे समय तक लंबित रहते हैं और कई बार बड़े विवाद का रूप ले लेते हैं।

    धमदाहा की धरती पहले भी कई बड़े भूमि विवादों की गवाह रही है। जमीन को लेकर यहां वर्षों से तनाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई मामलों में विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट, खूनी संघर्ष और हत्या जैसी घटनाएं भी हुईं। बावजूद इसके इस संवेदनशील अंचल में राजस्व कर्मियों और अमीनों की पर्याप्त नियुक्ति नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।

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    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रत्येक हल्के में नियमित रूप से राजस्व कर्मचारी उपलब्ध रहें और पर्याप्त संख्या में अमीनों की तैनाती हो, तो अधिकांश भूमि विवादों का समाधान शुरुआती स्तर पर ही किया जा सकता है। इससे लोगों को बार-बार अंचल कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और न्यायिक प्रक्रिया पर भी अनावश्यक बोझ कम होगा।

    जानकारों का मानना है कि भूमि विवादों को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ कानून-व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत राजस्व व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। समय पर सीमांकन, दाखिल-खारिज और अभिलेखों के अद्यतन होने से विवाद स्वतः कम हो सकते हैं।

    स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से मांग की है कि धमदाहा अंचल की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां शीघ्र पर्याप्त संख्या में राजस्व कर्मचारियों और अमीनों की नियुक्ति की जाए, ताकि भूमि संबंधी मामलों का समयबद्ध निष्पादन हो सके और वर्षों से चले आ रहे विवादों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

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