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    पूर्णिया के आंगनबाड़ी केंद्रों में दूषित पानी से संकट में बच्चों का भविष्य, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नाकाम

    Updated: Sat, 17 Jan 2026 12:06 PM (IST)

    पूर्णिया के धमदाहा प्रखंड में 25,050 आंगनबाड़ी बच्चे दूषित आर्सेनिक और आयरन युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। भू-जल में अत्यधिक दूषित तत्व होने से उनके स् ...और पढ़ें

    पूर्णिया के आंगनबाड़ी केंद्रों में दूषित पानी से संकट में बच्चों का भविष्य

    पूर्णिया के आंगनबाड़ी केंद्रों में दूषित पानी से संकट में बच्चों का भविष्य

    HighLights

    1. धमदाहा के 25,050 बच्चे दूषित आर्सेनिक-आयरन पानी पी रहे।

    2. आंगनबाड़ी केंद्रों में शुद्ध पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं।

    3. नल-जल योजना और प्यूरीफायर बच्चों को शुद्ध पानी देने में विफल।

    सुशांत, धमदाहा (पूर्णिया)। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद देशभर में शुद्ध पेयजल को लेकर बहस तेज है। इसी बीच पूर्णिया जिले के धमदाहा प्रखंड से सामने आई तस्वीर ने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां आंगनबाड़ी केंद्रों में नामांकित करीब 25,050 नौनिहाल रोजाना आर्सेनिक और आयरन युक्त दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

    धमदाहा प्रखंड में शुद्ध पेयजल की समस्या वर्षों से बनी हुई है। भू-जल में आयरन और आर्सेनिक की मात्रा मानक से कहीं अधिक है। ऐसे में बिना शोधन किया गया पानी पीने से पेट से जुड़ी बीमारियां आम हैं, जबकि छोटे बच्चों पर इसका असर और भी घातक हो सकता है।

    45 केंद्रों को नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट किया गया

    प्रखंड के 338 आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति चिंताजनक है। इनमें से 180 केंद्र आज भी किराए के कच्चे मकानों में संचालित हो रहे हैं। वहीं 109 केंद्रों के पास अपना भवन है, 45 केंद्रों को नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट किया गया है और चार केंद्र सामुदायिक भवनों में चल रहे हैं। 

    हैरानी की बात यह है कि जिन केंद्रों के पास अपना भवन है, वहां भी शुद्ध पेयजल के लिए आरओ या अन्य स्थायी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। पेयजल की अनुपलब्धता के कारण आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले बच्चों को मजबूरी में चापाकल का दूषित पानी पीना पड़ रहा है। इससे नौनिहालों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका लगातार बढ़ रही है। 

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    योजना की सफलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह 

    अभिभावकों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना सरकार ने बच्चों को पोषण, देखभाल और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी, लेकिन शुद्ध पेयजल की कमी इस योजना की सफलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है।

    उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले आंगनबाड़ी केंद्रों को स्टील का मैनुअल वाटर प्यूरीफायर उपलब्ध कराया गया था, लेकिन आज 98 प्रतिशत केंद्रों पर यह नजर नहीं आता। अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि नल-जल योजना के तहत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में शुद्ध जल आपूर्ति के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक इसका सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पाया। 

    10 प्रतिशत केंद्रों में ही नल-जल की आपूर्ति

    प्रखंड के महज 10 प्रतिशत केंद्रों में ही नल-जल की आपूर्ति पहुंच सकी है। जहां आपूर्ति हुई भी है, वहां या तो पानी नहीं आता या फिर पानी इतना दूषित है कि बच्चों ने उसे पीने से मना कर दिया। 

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा नौनिहालों को अपनी सेहत से चुकाना पड़ सकता है। अब जरूरत है कि प्रशासन और सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करे, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।